📈 तीसरी तिमाही के नतीजे: मुनाफ़ा क्यों बढ़ा, रेवेन्यू क्यों घटा?
NHPC लिमिटेड के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) मिली-जुली तस्वीर पेश करती है। जहां कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल (YoY) 38.7% की ज़बरदस्त उछाल के साथ ₹320.60 करोड़ पर पहुंच गया, वहीं ऑपरेशन से होने वाला कंसोलिडेटेड रेवेन्यू मामूली 2.9% घटकर ₹2,220.73 करोड़ पर आ गया।
स्टैंडअलोन (Standalone) बेसिस पर देखें तो, कंपनी का प्रॉफिट 7.0% बढ़कर ₹292.87 करोड़ रहा, लेकिन इसी दौरान रेवेन्यू 4.7% घटकर ₹1,877.47 करोड़ हो गया।
हालांकि, 9 महीनों (Nine Months) के लिए तस्वीर ज़्यादा सकारात्मक है। 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई 9 महीनों की अवधि में, स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ देखी गई, जो क्रमशः 9.4% और 9.5% बढ़कर ₹7,587.01 करोड़ और ₹8,799.76 करोड़ रहे। इसी अवधि में स्टैंडअलोन प्रॉफिट 4.6% बढ़कर ₹2,290.26 करोड़ और कंसोलिडेटेड प्रॉफिट 7.1% बढ़कर ₹2,305.58 करोड़ हो गया।
कंपनी के मार्जिन की बात करें तो, कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन 26.38% रहा, जबकि स्टैंडअलोन ऑपरेटिंग मार्जिन 19.35% दर्ज किया गया। कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट मार्जिन 14.44% और स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट मार्जिन 15.60% रहा।
💰 मुनाफ़े में उछाल की वजहें और CERC का फरमान
कंसोलिडेटेड प्रॉफिट में यह बड़ी बढ़ोतरी, रेवेन्यू ग्रोथ से ज़्यादा, कंपनी की बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency), घटती फाइनेंस कॉस्ट (Finance Cost) या किसी टैक्स एडजस्टमेंट (Tax Adjustment) का नतीजा हो सकती है। नतीजों में MAT क्रेडिट और नए प्रोजेक्ट्स से जुड़े डेफ़र्ड टैक्स (Deferred Tax) का भी असर दिखा।
एक अहम बात यह भी है कि NHPC को सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) की नई टैरिफ रेगुलेशन (Tariff Regulations) के तहत सबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट (Subansiri Lower Project) के लिए एसोसिएटेड ट्रांसमिशन सिस्टम (ATS) चार्जेस के तौर पर ₹781.45 करोड़ का भुगतान करना पड़ सकता है।
🎁 डिविडेंड का ऐलान और अहम रणनीतिक कदम
कंपनी के बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 14% यानी ₹1.40 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 10 फरवरी 2026 तय की गई है।
रणनीतिक तौर पर, NHPC ने पावर मिनिस्ट्री के निर्देश पर PTC इंडिया लिमिटेड में अपनी प्रमोटर (Promoter) भूमिका से हटने का प्रस्ताव दिया है और अपने नॉमिनी डायरेक्टर (Nominee Director) को वापस बुलाने का फैसला किया है। इसके साथ ही, ओड़िशा में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए ग्रीन एनर्जी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ ओड़िशा लिमिटेड (GEDCOL) के साथ हुए एमओयू (MoU) और प्रमोटर्स एग्रीमेंट (Promoters’ Agreement) को भी कैंसल कर दिया गया है।
🏗️ प्रोजेक्ट्स में तेज़ रफ़्तार
कंपनी अपने प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से कमीशन (Commission) कर रही है। 31 दिसंबर 2025 तक की 9 महीनों की अवधि में, 300 MW का कर्नासर सोलर पावर प्रोजेक्ट (Karnisar Solar Power Project) और 2000 MW के सबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट की एक यूनिट (250 MW) चालू की जा चुकी है। वहीं, सबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट की दूसरी यूनिट (250 MW) 1 फरवरी 2026 को चालू हुई।
🏦 बैलेंस शीट और कर्ज़ का हाल
31 दिसंबर 2025 तक, NHPC की स्टैंडअलोन नेट वर्थ (Net Worth) ₹40,133.29 करोड़ थी। कंपनी पर ₹42,195.40 करोड़ का पेड-अप डेट कैपिटल (Paid-up Debt Capital) था, जिससे डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (Debt-to-Equity Ratio) 1.05 रहा। कंसोलिडेटेड बेसिस पर, नेट वर्थ ₹41,465.47 करोड़ और डेट कैपिटल ₹48,553.35 करोड़ थी, जिसके चलते डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 1.17 दर्ज किया गया।
⚠️ जोखिम और आगे की राह
मुख्य जोखिम: सबसे बड़ा जोखिम CERC की टैरिफ नोटिफिकेशन और सबनसिरी प्रोजेक्ट से जुड़े चार्जेस से जुड़ा है। साथ ही, चालू और भविष्य के प्रोजेक्ट्स के एग्ज़िक्यूशन (Execution) में आने वाली दिक्कतें और 1 से ऊपर का डेट-टू-इक्विटी रेश्यो भी मॉनिटरिंग के मुख्य पॉइंट रहेंगे। Q3 में रेवेन्यू में आई गिरावट पर भी नज़र रखनी होगी।
आगे की उम्मीदें: निवेशक CERC टैरिफ एडजस्टमेंट्स के लॉन्ग-टर्म असर और PTC इंडिया से कंपनी के बाहर निकलने जैसे रणनीतिक बदलावों पर बारीकी से नज़र रखेंगे। प्रोजेक्ट पाइपलाइन (Project Pipeline) का प्रोग्रेस और बिजली उत्पादन का लेवल अगले 1-2 तिमाहियों के लिए अहम इंडिकेटर्स होंगे।
