NHPC Share: Q3 में हुआ बड़ा उलटफेर! PBT में घाटा, पर नेट प्रॉफिट मालामाल; डिविडेंड का ऐलान

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
NHPC Share: Q3 में हुआ बड़ा उलटफेर! PBT में घाटा, पर नेट प्रॉफिट मालामाल; डिविडेंड का ऐलान
Overview

NHPC के निवेशकों के लिए तीसरी तिमाही (Q3 FY26) के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी ने **283.16 करोड़ रुपये** का कंसोलिडेटेड PBT (प्रॉफिट बिफोर टैक्स) लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल के प्रॉफिट से बिलकुल विपरीत है। हालांकि, रेगुलेटरी एडजस्टमेंट्स (regulatory adjustments) के दम पर नेट प्रॉफिट में **38.7%** की शानदार **320.60 करोड़ रुपये** की बढ़त देखी गई। कंपनी ने **14%** का अंतरिम डिविडेंड (interim dividend) भी घोषित किया है। चिंता की बात यह है कि डेट-टू-इक्विटी रेश्यो (debt-to-equity ratio) बढ़कर **1.17** हो गया है और ऑपरेटिंग मार्जिन (operating margins) में भी गिरावट आई है।

नतीजों पर एक गहरी नजर: NHPC का वित्तीय चिट्ठा

NHPC लिमिटेड ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही और नौ महीनों के अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं। तस्वीर थोड़ी जटिल है, जिसमें PBT (प्रॉफिट बिफोर टैक्स) में बड़ा घाटा दिखा है, लेकिन नेट प्रॉफिट में उछाल आया है, जिसकी मुख्य वजह अकाउंटिंग एडजस्टमेंट हैं।

स्टैंडअलोन (Standalone) नतीजे:

  • ऑपरेशंस से रेवेन्यू (Revenue from operations) में पिछले साल के मुकाबले 4.7% की गिरावट आई और यह ₹1,877.47 करोड़ रहा।

  • कुल खर्च 25.4% बढ़कर ₹2,646.99 करोड़ हो गया, जिसके चलते स्टैंडअलोन PBT में ₹340.39 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया। यह पिछले साल के ₹314.31 करोड़ के प्रॉफिट से बड़ा बदलाव है।

  • इसके बावजूद, 'प्रॉफिट फॉर द पीरियड' यानी नेट प्रॉफिट 7.0% बढ़कर ₹292.87 करोड़ रहा। यह उछाल मुख्य रूप से ₹1,137.47 करोड़ के 'मूवमेंट इन रेगुलेटरी डेफरल अकाउंट बैलेंसेस' (net of tax) के कारण आया।

  • नौ महीनों (Nine Months) के नतीजों में, रेवेन्यू 9.4% बढ़कर ₹7,587.01 करोड़ हुआ, लेकिन PBT 29.3% घटकर ₹1,985.58 करोड़ पर आ गया। नेट प्रॉफिट में मामूली 4.6% की बढ़त के साथ यह ₹2,290.26 करोड़ रहा।
कंसोलिडेटेड (Consolidated) नतीजे:
  • कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 2.9% गिरकर ₹2,220.73 करोड़ रहा।

  • कंपनी ने ₹283.16 करोड़ का कंसोलिडेटेड PBT लॉस दर्ज किया, जो पिछले साल के ₹399.38 करोड़ के प्रॉफिट से बहुत अलग है।

  • हालांकि, नेट प्रॉफिट 38.7% की छलांग लगाकर ₹320.60 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण कंसोलिडेटेड लेवल पर भी रेगुलेटरी डेफरल अकाउंट्स (regulatory deferral accounts) में बड़ा मूवमेंट रहा।

  • नौ महीनों में, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 9.5% बढ़कर ₹8,799.76 करोड़ हुआ, जबकि PBT 22.3% घटकर ₹2,623.21 करोड़ रहा। नेट प्रॉफिट 7.1% बढ़कर ₹2,305.58 करोड़ हुआ।

मुनाफे की गुणवत्ता पर सवाल?

निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि PBT (ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी) और रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट के बीच बड़ा अंतर है। स्टैंडअलोन Q3 में ₹340.39 करोड़ के PBT लॉस को ₹292.87 करोड़ के नेट प्रॉफिट में बदल दिया गया। कंसोलिडेटेड PBT नेगेटिव होने के बावजूद नेट प्रॉफिट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी इसी रेगुलेटरी एडजस्टमेंट का नतीजा है। स्टैंडअलोन Q3 में बेसिक EPS (Earnings Per Share) इन रेगुलेटरी मूवमेंट्स को छोड़कर ₹(0.84) पर नेगेटिव में चला गया, जो ऑपरेशनल परफॉरमेंस पर सवाल खड़ा करता है।

बैलेंस शीट और मार्जिन पर दबाव:

  • खर्चों में बढ़ोतरी: स्टैंडअलोन Q3 में कुल खर्च 25.4% और कंसोलिडेटेड Q3 में 25.2% बढ़ा है, जो चिंताजनक है।
  • बढ़ता कर्ज: कंपनी का कर्ज बढ़ रहा है। स्टैंडअलोन बेसिस पर डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.93 से बढ़कर 1.05 हो गया है, और कंसोलिडेटेड लेवल पर यह 0.96 से बढ़कर 1.17 हो गया है।
  • लिक्विडिटी टाइट: लिक्विडिटी भी थोड़ी टाइट हुई है, करंट रेश्यो (current ratio) स्टैंडअलोन में 1.02 और कंसोलिडेटेड में 1.12 पर आ गया है।
  • ऑपरेटिंग मार्जिन में गिरावट: ऑपरेटिंग मार्जिन काफी सिकुड़ गए हैं। स्टैंडअलोन Q3 में यह 28.47% से गिरकर 19.35% पर आ गया, और कंसोलिडेटेड Q3 में 33.62% से घटकर 26.38% रह गया।

कॉर्पोरेट एक्शन और रणनीतिक बदलाव:


  • डिविडेंड: NHPC ने FY25-26 के लिए 14% (यानी ₹1.40 प्रति शेयर) का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

  • JV कैंसलेशन: सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए GEDCOL के साथ JV (Joint Venture) के MoU को रद्द कर दिया गया है।

  • PTC India से एग्जिट: मिनिस्ट्री ऑफ पावर के निर्देश के बाद, PTC India Limited में 'प्रमोटर' (Promoter) स्टेटस से बाहर निकलने का प्रस्ताव है।

मुख्य जोखिम और आगे की राह:

NHPC के सामने मुख्य जोखिम बढ़ता हुआ वित्तीय कर्ज, ऑपरेशनल प्रॉफिटेबिलिटी पर बढ़ते खर्चों का असर, और नेट प्रॉफिट के लिए रेगुलेटरी अकाउंटिंग पर निर्भरता हैं। रणनीतिक बदलाव भविष्य के फोकस या चुनौतियों का संकेत दे सकते हैं। कंपनी प्रबंधन ने आगे के लिए कोई विशेष गाइडेंस (guidance) नहीं दिया है, जिससे भविष्य की राहें मार्केट की स्थितियों और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर निर्भर करेंगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.