नतीजों का पूरा चिट्ठा
NHPC लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 4 फरवरी 2026 को हुई अपनी बैठक में 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3) और नौ महीनों (9M) के फाइनेंशियल नतीजों की समीक्षा की।
स्टैंडअलोन परफॉरमेंस (Q3 FY26 vs Q3 FY25):
- ऑपरेशंस से रेवेन्यू में 4.71% की सालाना गिरावट आई, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹1,970.35 करोड़ से घटकर ₹1,877.47 करोड़ रह गया।
- ऑपरेटिंग मार्जिन में बड़ी गिरावट देखी गई, जो पिछले साल की 28.47% की तुलना में घटकर 19.35% हो गया।
- कंपनी ने ₹(340.39) करोड़ का टैक्स-पूर्व घाटा (Loss Before Tax) दर्ज किया। हालांकि, ₹504.21 करोड़ के कुल टैक्स खर्च को समायोजित करने के बाद, ₹292.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट (Net Profit) दर्ज किया गया।
- बेसिक और डाइल्यूटेड ईपीएस (EPS) ₹0.29 रहा।
- नौ महीनों की अवधि में रेवेन्यू 9.38% बढ़कर ₹7,587.01 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹6,935.72 करोड़ था।
- नौ महीनों के लिए टैक्स-पूर्व मुनाफा ₹1,985.58 करोड़ रहा, जिससे ₹2,290.26 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ।
- इस नौ महीने की अवधि में ऑपरेटिंग मार्जिन 36.87% रहा।
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹2,220.73 करोड़ रहा।
- कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹320.60 करोड़ दर्ज किया गया।
- कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन 26.38% था।
- कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹8,799.76 करोड़ तक पहुंच गया।
- कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट ₹2,305.58 करोड़ रहा।
- कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग मार्जिन 41.37% था।
मार्जिन में गिरावट की वजह?
स्टैंडअलोन Q3 ऑपरेटिंग मार्जिन में 28.47% से 19.35% तक की बड़ी गिरावट का मुख्य कारण सबांश्री लोअर प्रोजेक्ट (Subansiri Lower Project) के लिए एसोसिएटेड ट्रांसमिशन सिस्टम (ATS) चार्जेज़ रहे, जिनका भुगतान इस तिमाही में ₹781.45 करोड़ के रूप में दर्ज किया गया। हालांकि नौ महीने के नतीजे मजबूत ग्रोथ दिखा रहे हैं, तिमाही के नतीजे चिंता का विषय हैं।
डिविडेंड और रणनीतिक कदम
शेयरधारकों को रिटर्न देने की अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए, बोर्ड ने FY2025-26 के लिए 14% (₹1.40 प्रति इक्विटी शेयर) का अंतरिम डिविडेंड मंजूर किया है।
रणनीतिक तौर पर, NHPC ने ओडिशा में ग्रीन एनर्जी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (GEDCOL) के साथ फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए एमओयू (MoU) और प्रमोटर्स एग्रीमेंट (Promoters' Agreement) को रद्द करने का फैसला किया है। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ पावर के निर्देशानुसार, NHPC PTC इंडिया लिमिटेड में अपने नॉमिनी डायरेक्टर को वापस बुलाएगा और वहां अपनी प्रमोटर की स्थिति समाप्त कर देगा। ये कदम कंपनी की निवेश रणनीति और साझेदारी के पुनर्मूल्यांकन का संकेत देते हैं।
नए प्रोजेक्ट्स जैसे 800 MW का पार्वती-II (Parbati-II) और सबांश्री लोअर का एक यूनिट चालू होना भविष्य के रेवेन्यू के लिए सकारात्मक है। सब्सिडियरी जलपावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JPCL) के साथ विलय की प्रक्रिया भी जारी है।
आगे का रास्ता और जोखिम
मुख्य जोखिमों में नए प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की समय-सीमा, CERC रेगुलेशंस (2024-29) के तहत टैरिफ का बदलना और रणनीतिक कदमों का भविष्य की ग्रोथ पर असर शामिल है। निवेशक NHPC की ऑपरेशनल क्षमता और रेगुलेटरी परिदृश्य को संभालने की क्षमता पर नजर रखेंगे। कंपनी की भविष्य की प्रोजेक्ट पाइपलाइन और रणनीतिक दिशा स्पष्ट होना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
