अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (Siang Upper Multipurpose Project) को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। NHPC Limited की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में जारी स्थानीय तनाव के कारण कामकाज ठप हो गया है, जिससे भविष्य में देरी और लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
प्रोजेक्ट के सामने कड़ी चुनौतियां
NHPC Limited के लिए अरुणाचल प्रदेश में हालात मुश्किल होते दिख रहे हैं। सियांग अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन (Siang Affected Area Youth Association) के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों के कारण ईस्ट, अपर और सियांग डिस्ट्रिक्ट्स में कामकाज पूरी तरह से रुक गया है। इन विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर कंपनी के 'प्री-फिजिबिलिटी सर्वे' (Pre-feasibility survey) पर पड़ा है, जो अब ठप पड़ चुका है।
क्यों है यह प्रोजेक्ट इतना अहम?
यह 11,200 मेगावाट की परियोजना सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य चीन द्वारा यारलुंग त्सांगपो (सियांग) नदी पर किए जा रहे बड़े बांध निर्माण का मुकाबला करना है। हालांकि, स्थानीय समुदायों को अपनी जमीनों और सांस्कृतिक धरोहर के खोने का डर है, जिसके कारण वे लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को इन 'एग्जीक्यूशन रिस्क' (Execution risks) पर नजर रखनी चाहिए। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स भारी निवेश वाले होते हैं, और अगर प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो 'कॉस्ट ओवररन' (Cost overrun) का सीधा असर कंपनी के फाइनेंशियल पर पड़ता है। सुरक्षा के लिए रैपिड एक्शन फोर्स (Rapid Action Force) की तैनाती भी की गई है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब सबकी नजरें कंपनी के एक्सचेंज फिलिंग्स पर हैं। अगर प्रशासन और स्थानीय लोग किसी समझौते पर नहीं पहुँचते हैं, तो इस बड़ी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) परियोजना को और भी अधिक देरी का सामना करना पड़ सकता है।
