NHPC के जम्मू-कश्मीर स्थित 1,856 MW के सवाल्कोट हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए सरकार ₹18,700 करोड़ के सबऑर्डिनेटेड डेट (subordinated debt) पैकेज पर विचार कर रही है। इस पैसे से ₹31,380 करोड़ की भारी-भरकम प्रोजेक्ट लागत को सहारा मिलेगा। निवेशकों को इस फंडिंग का कंपनी के कैपिटल स्पेंडिंग प्लान पर असर देखना होगा, खासकर बड़े रीजनल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े ऐतिहासिक एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) को देखते हुए।
पावर मिनिस्ट्री (Ministry of Power) NHPC लिमिटेड के जम्मू-कश्मीर में बन रहे 1,856 MW के सवाल्कोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए एक बड़े फाइनेंशियल प्रपोजल का इवैल्यूएशन कर रही है। इस प्रपोजल के तहत, कंपनी को करीब ₹18,700 करोड़ का सबऑर्डिनेटेड डेट (subordinated debt) दिया जा सकता है। यह एक खास तरह की फाइनेंसिंग है, जिसके रीपेमेंट की शर्तें स्टैंडर्ड लोन से अलग होती हैं, और इससे कंपनी को ₹31,380 करोड़ की कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
यह फंडिंग सपोर्ट अभी शुरुआती स्टेज में है और इसे एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमेटी (expenditure finance committee) से क्लीयरेंस मिलने के बाद फाइनल सरकारी अप्रूवल की ज़रूरत होगी। अगर यह अप्रूव हो जाता है, तो यह सरकार की ओर से इस रीजन में हाइड्रोपावर एसेट्स (hydropower assets) को डेवलप करने की रफ्तार बढ़ाने की एक स्ट्रेटेजिक मूव होगी, जो कि देश की ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पहलों के साथ मेल खाती है।
चिनाब नदी पर स्थित सवाल्कोट प्रोजेक्ट, NHPC की अपनी कैपेसिटी बढ़ाने की स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। हाल ही में सरकार ने कई बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को अप्रूवल दिया है, लेकिन निवेशकों को कंपनी के कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) पर नज़र बनाए रखनी चाहिए। जम्मू-कश्मीर जैसे कॉम्प्लेक्स टेरेन (complex terrains) में बड़े प्रोजेक्ट्स ऐतिहासिक रूप से टेक्निकल, जियोलॉजिकल और रीजनल Challenges की वजह से डिले का शिकार होते रहे हैं। इन एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risks) की वजह से प्रोजेक्ट टाइमलाइन शुरुआती अनुमानों से ज़्यादा बढ़ सकती है और कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल (capital expenditure cycle) पर भी असर पड़ सकता है।
फाइनेंशियल परफॉरमेंस की बात करें तो, NHPC ने लगातार अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के पहले क्वार्टर में, कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू (operational revenue) ₹3,808 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 18.5% ज़्यादा है। इसी अवधि में नेट प्रॉफिट (Net Profit) ₹1,096 करोड़ रहा, जबकि EBITDA मार्जिन 61.8% रहा। इन स्टेबल नंबर्स के बावजूद, कंपनी को सवाल्कोट और सुबनसिरी लोअर प्रोजेक्ट (Subansiri Lower project) जैसे बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के लिए भारी कैपिटल रिक्वायरमेंट (capital requirements) को मैनेज करना पड़ता है।
मार्केट की बात करें तो, NHPC के शेयर हाल ही में एक्सचेंजों पर ₹76–₹77 के लेवल पर ट्रेड कर रहे थे। स्टॉक की चाल अक्सर सेक्टर के ओवरऑल ट्रेंड और कैपेसिटी एडिशन की स्पीड से प्रभावित होती है। निवेशकों के लिए सबसे अहम बात सबऑर्डिनेटेड डेट प्रपोजल की ऑफिशियल स्टेटस और प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन टाइमलाइन पर कोई भी अपडेट होगी, खासकर मेन डैम और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क्स के लिए टेंडर्स की प्रोग्रेस। रेगुलेटरी क्लेरिटी (Regulatory clarity) और लॉन्ग-टर्म पावर परचेस एग्रीमेंट्स (power purchase agreements) की स्टेबिलिटी भी प्रोजेक्ट की लॉन्ग-टर्म फिजिबिलिटी (long-term feasibility) को तय करने वाले की-फैक्टर होंगे।
