National Capital Region Transport Corporation (NCRTC) ने दिल्ली-मेरठ रेल कॉरिडोर के लिए **25 साल** का बिजली खरीद समझौता किया है। जालौन, उत्तर प्रदेश में **110 MW** का सोलर प्लांट लगाया जाएगा, जिससे कॉरिडोर की **60%** बिजली जरूरत पूरी होगी और ऑपरेटिंग खर्च में **25%** तक की कटौती का लक्ष्य है।
ग्रीन एनर्जी की ओर बड़ा कदम
दिल्ली-मेरठ Namo Bharat कॉरिडोर अब रिन्यूएबल एनर्जी की दिशा में एक बड़ा बदलाव देख रहा है। 29 अगस्त 2026 को हस्ताक्षरित इस एग्रीमेंट के तहत जालौन, उत्तर प्रदेश में एक कैप्टिव सोलर पावर प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का निवेश ₹450 करोड़ आंका गया है, जिसे 80:20 के डेट-इक्विटी रेशियो पर स्ट्रक्चर किया गया है।
ज्वाइंट वेंचर की साझेदारी
यह प्रोजेक्ट NIRL NCRTC Renewables Limited (NNRL) के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। इसमें NLC India Renewables Limited की हिस्सेदारी 74% है, जबकि NCRTC के पास शेष 26% स्टेक है।
क्यों है यह प्रोजेक्ट खास?
हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए बिजली खर्च सबसे बड़े ऑपरेटिंग खर्चों में से एक है। इस समझौते से NCRTC को दो बड़े फायदे होंगे:
- कॉस्ट कंट्रोल: अगले 25 वर्षों तक ओपन-मार्केट में बिजली की कीमतों में होने वाली उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी।
- बचत का लक्ष्य: सालाना बिजली खर्च में 25% की कमी लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के नजरिए से सालाना 1.77 लाख टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा, लेकिन इसके सामने कुछ जोखिम भी हैं। प्रोजेक्ट की 24 महीने की कमीशनिंग टाइमलाइन तय की गई है, जिसमें देरी होने पर संभावित बचत पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, ग्रिड ट्रांसमिशन पॉलिसी और व्हीलिंग चार्ज में बदलाव आने वाले समय में प्रोजेक्ट के कॉस्ट-बेनिफिट एनालिसिस को प्रभावित कर सकते हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए, NLC India का यह सब्सिडियरी मॉडल रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनी की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। अब नजरें इस बात पर होंगी कि क्या कंपनी 2 साल की डेडलाइन के भीतर इसे समय पर चालू कर पाती है या नहीं, क्योंकि भविष्य के अन्य Namo Bharat कॉरिडोर्स के लिए यही मॉडल एक टेम्पलेट का काम करेगा।
