NCRTC ने दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की बिजली लागत घटाने के लिए **110 MW** के सोलर प्लांट का करार किया है। **₹450 करोड़** के इस प्रोजेक्ट से ऑपरेशनल खर्चों में **25%** की बड़ी कटौती का लक्ष्य रखा गया है।
भारी-भरकम बिजली बिल पर लगाम
नमो भारत रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर के लिए NCRTC ने 25 साल के एक बड़े पावर परचेज एग्रीमेंट पर दस्तखत किए हैं। उत्तर प्रदेश के जालौन में 110 MW का सोलर पावर प्लांट लगाया जाएगा, जो कंपनी के लिए ग्रीन एनर्जी का बड़ा जरिया बनेगा।
कैसे काम करेगा यह प्रोजेक्ट?
यह पूरा प्रोजेक्ट NIRL NCRTC Renewables Ltd (NNRL) के जरिए पूरा होगा। इसमें NLC India Renewables की हिस्सेदारी 74% है, जबकि NCRTC के पास 26% शेयर हैं। इस सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए कुल ₹450 करोड़ का निवेश किया गया है और बिजली की दर ₹2.73 प्रति यूनिट तय की गई है।
वित्तीय गणित और भविष्य की राह
वर्तमान में नमो भारत कॉरिडोर के कुल ऑपरेटिंग बजट का 30% से 35% हिस्सा केवल बिजली के बिल में जाता है। इस नए सोलर प्लांट के जरिए कंपनी अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60% हिस्सा पूरा करने की तैयारी में है।
चूंकि नमो भारत की राइडरशिप 4 करोड़ के पार निकल चुकी है, इसलिए लंबी अवधि की सस्टेनेबिलिटी के लिए यह फैसला अहम है। अब नजरें इस पर होंगी कि क्या कंपनी अगले 24 महीनों के तय समय सीमा के भीतर इस प्लांट को चालू कर पाती है या नहीं।
