गुजरात SPPA डील से Mundra प्लांट को मिली संजीवनी
गुजरात सरकार द्वारा Tata Power के मुंद्रा स्थित इंपोर्टेड कोल-आधारित पावर प्लांट के लिए सप्लीमेंटल पावर परचेज एग्रीमेंट (SPPA) को मंजूरी मिलना एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। इस फैसले से प्लांट के सालाना नुकसान में करीब 75% की भारी कमी आने का अनुमान है, जो ₹1,700-1,800 करोड़ से घटकर लगभग ₹700 करोड़ रह सकता है। Motilal Oswal का अनुमान है कि इससे वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए कंपनी की कमाई (Earnings) में 4.5%-5.5% का अपवर्ड रिवीजन होगा। यह प्लांट जून 2025 तक सेक्शन 11 के तहत काम कर रहा था और उसके बाद से नॉन-ऑपरेशनल था।
Tata Power के ग्रोथ के कई रास्ते
मुंद्रा प्लांट के रिवाइवल के अलावा, Tata Power की ग्रोथ कई और मोर्चों पर भी मजबूत दिख रही है। कंपनी को ओडिशा और दिल्ली में अपने डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटीज से अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। साथ ही, रूफटॉप सोलर सेक्टर में विस्तार और 10GW इंगट और वेफर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज लगाने की योजनाएं सप्लाई चेन को मजबूत करेंगी। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (Discoms) के संभावित प्राइवेटाइजेशन जैसी नई संभावनाएं भी कंपनी के लिए बड़ा विस्तार ला सकती हैं।
इंडोनेशियाई कोल बिजनेस से भी मिलेगा बूस्ट
Tata Power के लिए इंडोनेशिया स्थित कोल बिजनेस भी मुनाफे का एक और जरिया बन सकता है। Motilal Oswal के अनुसार, अगर इंडोनेशियाई कोयला रियलाइजेशन में प्रति टन $10 का भी इजाफा होता है, तो इससे वित्त वर्ष 2027 के नेट प्रॉफिट में सालाना 18% तक का बूस्ट मिल सकता है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, जैसे कि ईरान-इजराइल संघर्ष, के कारण कोयले की ग्लोबल कीमतों में हो रही बढ़ोतरी इस संभावना को और बढ़ा रही है। कंपनी की इंडोनेशियाई वेंचर्स Kaltim Prima (30% स्टेक) और BSSR & AGM (26% स्टेक) में अहम हिस्सेदारी है, जिससे वह इन बढ़ती कीमतों का फायदा उठा सकती है।
हाल की फाइनेंशियल परफॉरमेंस और स्टॉक व्यू
हालांकि पिछले एक साल में Tata Power के शेयर ने सिर्फ 4% का मामूली रिटर्न दिया है और पिछले पांच ट्रेडिंग सेशन में 2.25% की गिरावट आई है, Motilal Oswal इसमें बड़ा पोटेंशियल देख रहा है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी ने ₹1,194.33 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में मामूली बढ़ोतरी है। वहीं, ऑपरेशंस से रेवेन्यू 4% घटकर ₹14,485 करोड़ रहा, लेकिन EBITDA 12% बढ़कर ₹3,913 करोड़ हो गया। ₹455 का टारगेट प्राइस निवेशकों के लिए भारतीय एनर्जी मार्केट में एक आकर्षक मौका पेश करता है।