मानसून का डबल अटैक: पावर डिमांड गिरी, थर्मल कंपनियों की बढ़ी मुश्किल, रिन्यूएबल सेक्टर चमका

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
मानसून का डबल अटैक: पावर डिमांड गिरी, थर्मल कंपनियों की बढ़ी मुश्किल, रिन्यूएबल सेक्टर चमका
Overview

इस वितीय वर्ष (FY26) में मानसून की लंबी अवधि के कारण बिजली की मांग में आई नरमी का असर थर्मल पावर कंपनियों पर पड़ रहा है। NTPC और Adani Power जैसी बड़ी कंपनियों को अपने उत्पादन में कमी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, Adani Green Energy जैसे रिन्यूएबल एनर्जी के खिलाड़ियों के लिए यह एक शानदार अवसर साबित हो रहा है।

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मानसून ने रोकी बिजली की रफ्तार, थर्मल उत्पादन पर असर

मानसून की मार झेल रही भारत की थर्मल पावर जेनरेटर कंपनियां FY26 में उत्पादन में कमी के दौर से गुजर रही हैं। कुल ऊर्जा खपत Q4FY26 में साल-दर-साल सिर्फ 1.9 फीसदी बढ़कर 425 बिलियन यूनिट रही, जो पिछली तिमाही के 8 फीसदी के मुकाबले काफी कम है। इस दबाव के कारण NTPC जैसी कंपनियों का उत्पादन 4 फीसदी साल-दर-साल घट गया है। उनकी क्षमता उपयोगिता का पैमाना, प्लांट लोड फैक्टर (PLF), गिरकर 65 फीसदी पर आ गया है। Tata Power को भी अपने मुंद्रा प्लांट में उत्पादन में बड़ी कटौती करनी पड़ी है।

थर्मल के मुकाबले रिन्यूएबल का दबदबा

इसके विपरीत, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में जोरदार ग्रोथ दिख रही है। ACME Solar Holdings और NTPC Green Energy अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं, जबकि Adani Green Energy साल-दर-साल उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी के लिए तैयार है। यह साफ दिखाता है कि रिन्यूएबल सेक्टर मार्केट शेयर और ग्रोथ के अवसर तेजी से कब्जा रहा है।

व्यक्तिगत कंपनियों का प्रदर्शन मिलाजुला

व्यक्तिगत कंपनियों के नतीजों में मिलाजुला प्रदर्शन देखा जा रहा है। NLC India अपने घाटमपुर और TPS-II प्लांट में बेहतर प्लांट लोड फैक्टर और नई क्षमता से राजस्व बढ़ने की उम्मीद कर रही है, जिससे ऑपरेटिंग प्रॉफिट साल-दर-साल 80 फीसदी से ज्यादा उछल सकता है। JSW Energy को उम्मीद है कि बेहतर PLF और सीधे बाजार में बेची जाने वाली पावर (मर्चेंट सेल्स) की ऊंची कीमतों से राजस्व 40 फीसदी बढ़ सकता है, हालांकि लागत बढ़ने से नेट प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। सहायक कंपनियां Skipper और Genus Power Infrastructures बड़े ऑर्डर बैकलॉग के सहारे स्थिर ग्रोथ के लिए तैयार हैं। Genus Power से FY26 के राजस्व ग्रोथ लक्ष्यों को पूरा करने की उम्मीद है।

पावर ट्रांसमिशन: विकास का प्रमुख क्षेत्र

पावर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में लंबी अवधि के बड़े अवसर मौजूद हैं। 2023 से 2032 के बीच ग्रिड का विस्तार करने के लिए अनुमानित ₹9.2 ट्रिलियन के कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) की योजना है, जो बढ़ती रिन्यूएबल क्षमता और इंटीग्रेशन की जरूरतों से प्रेरित है। यह आउटलुक Power Grid Corporation of India जैसी कंपनियों को महत्वपूर्ण लंबी अवधि के लाभ की स्थिति में रखता है, भले ही उनके Q4FY26 के नतीजे औसत रहने की उम्मीद हो।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.