Ministry of Power का बड़ा कदम: बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए नया 'Data Sharing Framework' लॉन्च

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Ministry of Power का बड़ा कदम: बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए नया 'Data Sharing Framework' लॉन्च

Ministry of Power ने भारतीय बिजली सेक्टर में आंकड़ों की एकरूपता लाने के लिए एक वॉलंटरी डेटा-शेयरिंग फ्रेमवर्क पेश किया है। 'National Electricity Data Division' (NEDD) के गठन से अब रिपोर्टिंग की उलझनें खत्म होंगी और डेटा में पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे निवेशकों के लिए पावर कंपनियों की परफॉर्मेंस को समझना आसान हो जाएगा।

भारत सरकार का बिजली मंत्रालय अब पावर सेक्टर के आधुनिकीकरण की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। वर्तमान में, इस इंडस्ट्री में डेटा को लेकर बड़ी विसंगतियां थीं, जहां अलग-अलग राज्य और केंद्रीय एजेंसियां मुख्य बिजली मेट्रिक्स के लिए अलग-अलग पैमानों का उपयोग करती थीं। इस नई नीति का उद्देश्य जनरेशन कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटीज के बीच डेटा के आदान-प्रदान के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार करना है।

नई निगरानी और बुनियादी ढांचा

इस बदलाव के प्रबंधन के लिए सरकार ने Central Electricity Authority (CEA) के तहत 'National Electricity Data Division' (NEDD) की स्थापना की है। यह डिवीजन 'National Power Portal' के जरिए एक सेंट्रलाइज्ड पोर्टल चलाएगी, जिससे नीति निर्माताओं के लिए डेटा तक पहुंच आसान होगी। इसकी निगरानी के लिए एक 'National Electricity Data Governance Committee' भी बनाई गई है, जो Ministry of Electronics and Information Technology के साथ मिलकर काम करेगी।

डेटा सुरक्षा और निवेशकों के लिए मायने

सुरक्षा के लिहाज से, भाग लेने वाली प्रत्येक कंपनी को एक सीनियर लेवल 'Data Governance Officer' नियुक्त करना होगा। खास बात यह है कि उपभोक्ता डेटा को पूरी तरह 'अनाम' (anonymize) किया जाएगा ताकि गोपनीयता बनी रहे। इसके अलावा, कंपनियां अपनी क्रिटिकल जानकारी को 'नॉन-शेयरबल' घोषित कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि डेटा स्टैंडर्डाइज होने से पावर कंपनियों की ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर ढंग से ट्रैक किया जा सकेगा। अब तक अलग-अलग राज्यों और प्राइवेट प्लेयर्स के परफॉर्मेंस की तुलना करना काफी मुश्किल होता था, लेकिन इस नई व्यवस्था के बाद बेहतर इन्वेस्टमेंट फैसले लेना आसान हो सकता है। हालांकि, यह फ्रेमवर्क अभी 'वॉलंटरी' है, इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि कितनी बड़ी कंपनियां इसे अपनाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.