Middle East Crude Oil: तनाव के बीच मिडिल ईस्ट का तेल निर्यात प्री-वॉर लेवल के पार, सप्लाई चेन पर मंडराया संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Middle East Crude Oil: तनाव के बीच मिडिल ईस्ट का तेल निर्यात प्री-वॉर लेवल के पार, सप्लाई चेन पर मंडराया संकट

मिडिल ईस्ट से तेल निर्यात सितंबर के अंत में **22.5 मिलियन बैरल प्रति दिन** के शिखर पर पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले के औसत से काफी ज्यादा है। हालांकि नए रास्तों के जरिए सप्लाई बरकरार है, लेकिन समुद्री हमलों और बीमा लागत में बढ़ोतरी ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए बड़ा रिस्क बनी हुई है।

मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल का निर्यात आश्चर्यजनक मजबूती दिखा रहा है। सितंबर 2026 के अंत में यह निर्यात 19.5 मिलियन से 22.5 मिलियन बैरल प्रति दिन के बीच दर्ज किया गया। यह आंकड़ा मार्च 2025 से फरवरी 2026 के 18 मिलियन बैरल प्रति दिन के औसत से काफी ऊपर है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास सुरक्षा हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

लॉजिस्टिक्स में बड़ा बदलाव

निर्यात की इस रिकवरी के पीछे लॉजिस्टिक्स में आया एक बड़ा बदलाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य के जोखिमों से बचने के लिए एनर्जी एक्सपोर्टर्स ने वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जिसमें सऊदी अरब की East-West पाइपलाइन और यूएई की Fujairah पाइपलाइन शामिल हैं। मौजूदा समय में मिडिल ईस्ट से होने वाला लगभग 40% क्रूड एक्सपोर्ट होर्मुज के रास्ते को बायपास कर रहा है, जबकि संघर्ष शुरू होने से पहले यह आंकड़ा महज 17% था।

समुद्री हमलों का खतरा

सफलतापूर्वक रास्तों को बदलने के बावजूद ट्रांजिट माहौल खतरनाक बना हुआ है। समुद्री खुफिया आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में कमर्शियल शिपिंग पर कम से कम 16 टैंकर हमलों की पुष्टि हुई है, जो क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने के बाद से सबसे ज्यादा है। हाल ही में 1 अक्टूबर को कुवैत के टैंकर 'Kazimah III' पर हमले की घटना ने साफ कर दिया है कि समुद्री रास्ता अभी भी लगातार खतरे की जद में है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

इन्वेस्टर्स के लिए स्थिति दोहरी है। एक ओर तेल सफलतापूर्वक ग्लोबल मार्केट तक पहुंच रहा है, तो दूसरी ओर इसकी लागत बढ़ गई है। सुरक्षा उपायों की जरूरत, ज्यादा फ्रेट रेट्स और 'वॉर-रिस्क' इंश्योरेंस प्रीमियम ने ऑपरेशनल खर्चों को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, यानबू (Yanbu) जैसी टर्मिनल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता एक 'सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर' की तरह है। यदि इन बुनियादी ढांचों पर कोई असर पड़ता है, तो निर्यात की हालिया बढ़त तेजी से गिर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.