मध्य पूर्व संकट का असर: एशिया की LNG इम्पोर्ट में 8 साल की भारी गिरावट, अमेरिका बना बड़ा एक्सपोर्टर!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
मध्य पूर्व संकट का असर: एशिया की LNG इम्पोर्ट में 8 साल की भारी गिरावट, अमेरिका बना बड़ा एक्सपोर्टर!
Overview

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मचा दी है, जिसके चलते लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के सप्लाई में बड़ा झटका लगा है। मार्च 2026 में एशिया में LNG इम्पोर्ट पिछले **8 सालों** के सबसे निचले स्तर **2.11 करोड़ टन** पर आ गया है। इस बड़े उलटफेर ने वैश्विक बाजार को हिला दिया है और संयुक्त राज्य अमेरिका (US) LNG एक्सपोर्ट में एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है।

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एशिया की मांग में आई भारी कमी

मार्च 2026 में एशिया का लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इम्पोर्ट 2.11 करोड़ टन रहा, जो कि 2019 के बाद इसी महीने का सबसे निचला आंकड़ा है। गैस एक्सपोर्टिंग कंट्रीज़ फोरम (GECF) के मुताबिक, यह 4.3% की साल-दर-साल गिरावट सीधे तौर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कतर (Qatar) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा सप्लाई में की गई कटौती के कारण हुई है। इस संकट ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे अहम रास्तों से होने वाली सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है। कतर के दो LNG ट्रेनों में हुए नुकसान, जिससे 1.28 करोड़ टन प्रति वर्ष की क्षमता खत्म हो गई है, ने भी इस सप्लाई की चुनौती को बढ़ा दिया है। वैश्विक स्तर पर, LNG एक्सपोर्ट में 6.8% की साल-दर-साल गिरावट आई है, जो जुलाई 2020 के बाद की सबसे बड़ी कमी है।

मध्य पूर्व सप्लाई में रुकावट का असर

मध्य पूर्व संकट का तत्काल असर यह हुआ कि एशिया के स्पॉट LNG की कीमतें (JKM) मार्च में $20/MMBtu के पार चली गईं, लेकिन यह स्थिति एक बड़े संरचनात्मक बदलाव को जन्म दे रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका (US), Corpus Christi Stage 3 और Plaquemines LNG में अपनी नई क्षमता के साथ, मार्च में रिकॉर्ड 1.17 करोड़ टन एक्सपोर्ट के साथ सबसे आगे रहा। ऑस्ट्रेलिया ने 68.5 लाख टन और रूस ने रिकॉर्ड 33 लाख टन का उत्पादन किया। विरोधाभासी रूप से, यूरोपीय संघ को रूस के LNG एक्सपोर्ट मार्च में 2.46 अरब क्यूबिक मीटर के रिकॉर्ड मासिक उच्च स्तर पर पहुंच गए, क्योंकि बाजार उपलब्ध वॉल्यूम की तलाश में थे। विश्लेषकों ने पहले 2026 में अधिशेष (surplus) की उम्मीद की थी, लेकिन ये भू-राजनीतिक झटके अब नज़दीकी समय के संतुलन को कस रहे हैं और कीमतों में अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं, जिससे यूरोप की कीमतें (TTF) भी बढ़ गई हैं।

संकट के बीच अमेरिकी एक्सपोर्ट में उछाल

वर्तमान भू-राजनीतिक संकट वैश्विक LNG इंफ्रास्ट्रक्चर में गहरी कमजोरियों को उजागर करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कतर और UAE के LNG एक्सपोर्ट का 93-96% हिस्सा ले जाता है, नौसैनिक गतिविधियों के कारण व्यावसायिक यातायात के लिए प्रभावी ढंग से अवरुद्ध हो गया है। वैश्विक LNG सप्लाई का लगभग 15% हिस्सा खत्म करने वाले इस अहम रास्ते की भेद्यता (vulnerability) 2022 में यूरोप के लिए रूसी पाइपलाइन गैस के नुकसान के झटके को याद दिलाती है, लेकिन इसके वैकल्पिक रास्ते कम हैं। QatarEnergy ने फोर्स मेज्योर (force majeure) घोषित किया है, और क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत में अनुमानित 3-5 साल लगने की उम्मीद है, जिसका मतलब है कि काफी क्षमता लंबे समय तक बंद रहेगी। यह कतर की नॉर्थ फील्ड विस्तार परियोजनाओं में देरी कर सकता है, जिससे 2028 तक वैश्विक सप्लाई ग्रोथ सीमित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप कीमतों में आई तेजी डिमांड को कम कर सकती है, जिससे एशियाई उद्योगों को कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहने पर कोयले पर वापस स्विच करने पर विचार करना पड़ सकता है। यूरोप, जिसने रूसी पाइपलाइन गैस पर निर्भरता कम की है, अब इन नाजुक व्यापार मार्गों से वैश्विक LNG बाजार की अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।

भविष्य का बाजार आउटलुक

तत्काल सप्लाई शॉक के बावजूद, 2026 के लिए लंबी अवधि के आउटलुक में वैश्विक स्तर पर LNG सप्लाई में महत्वपूर्ण वृद्धि का अनुमान है, जिसमें उत्पादन 46 करोड़ से 48.4 करोड़ टन के बीच रहने की उम्मीद है। विश्लेषकों को खरीदार के बाजार (buyer's market) की ओर बदलाव की उम्मीद है, जिसमें कीमतें 2026 तक घटकर $9/MMBtu तक गिर सकती हैं। हालांकि, जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता कीमतों में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव पैदा कर रही है, जिससे JKM और TTF की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। एशिया की मांग, खासकर चीन और भारत से, मजबूत होने और नई सप्लाई को अवशोषित करने का अनुमान है। भंडारण की जरूरतों के कारण यूरोपीय इम्पोर्ट भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है। फिर भी, मध्य पूर्व की सप्लाई में निरंतर रुकावट और कतर की सुविधाओं की मरम्मत में लंबा समय लगने से कीमतों में नरमी आने में देरी हो सकती है, जिससे बाजार में कसावट बनी रह सकती है और 2027 तक स्पॉट कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बना रह सकता है।

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