McKinsey की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस कंपनियां सालाना **$230 बिलियन** की अतिरिक्त वैल्यू बना सकती हैं। हालांकि, इससे पारंपरिक सर्विस कंपनियों के रेवेन्यू पर दबाव बढ़ने का रिस्क भी है।
वैल्यू का पूरा गणित
McKinsey & Company की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, AI का प्रभाव तीन चरणों में देखा जाएगा। शुरुआत में मौजूदा टेक्नोलॉजी से $65 बिलियन की वैल्यू मिलेगी, जो स्केल बढ़ने पर $125 बिलियन और पूरी तरह मैच्योर होने पर $230 बिलियन तक पहुंच सकती है। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए सालाना $30 बिलियन से ज्यादा का निवेश डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और कंप्यूटिंग पावर में करना होगा। वहीं, बेहतर रिजर्व असेसमेंट के जरिए AI एक्सप्लोरेशन तकनीक $35 बिलियन सालाना का अतिरिक्त फायदा दे सकती है।
निवेशकों के लिए काम की बात (Concentration Play)
रिपोर्ट के अनुसार, AI का फायदा हर जगह नहीं, बल्कि 10 मुख्य क्षेत्रों में सिमटा हुआ है, जिसमें प्रोडक्शन ऑप्टिमाइजेशन, ड्रिलिंग एफिशिएंसी और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस शामिल हैं। जो कंपनियां इन चुनिंदा बॉटल्सनेक (bottlenecks) पर ध्यान देंगी, वही बेहतर रिटर्न देख पाएंगी।
सर्विस कंपनियों पर खतरे के बादल
यह बदलाव ऑयलफील्ड सर्विस कंपनियों के लिए चिंता का सबब बन सकता है। अब तक ये कंपनियां 'एक्टिविटी-बेस्ड बिलिंग' पर टिकी थीं, लेकिन AI के आने से कंपनियों को कम रिसोर्स में ज्यादा आउटपुट मिलेगा, जिससे सर्विस आवर्स की डिमांड घट सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब $60 बिलियन का रेवेन्यू रिस्क में हो सकता है। अब सर्विस प्रोवाइडर्स को अपने बिजनेस मॉडल को बदलकर 'वैल्यू-शेयरिंग' पर फोकस करना होगा, ताकि वे केवल काम के घंटों के बजाय परफॉर्मेंस के आधार पर पैसे कमा सकें।
