Parli Power Plant: प्रदूषण की मार! Maharashtra के दो यूनिट्स पर CPCB ने लगाई फौरन रोक

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Parli Power Plant: प्रदूषण की मार! Maharashtra के दो यूनिट्स पर CPCB ने लगाई फौरन रोक
Overview

Maharashtra के Parli Thermal Power Station (PTPS) की यूनिट 6 और 8 को Central Pollution Control Board (CPCB) ने तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। **5 फरवरी 2026** को जारी हुए इस निर्देश का मुख्य कारण लगातार पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और ऑपरेटिंग परमिट का एक्सपायर होना है। अब Maharashtra Pollution Control Board (MPCB) इस आदेश को लागू करने का काम करेगी।

प्लांट बंद होने की मुख्य वजहें

CPCB के आदेश के पीछे की वजह PTPS की यूनिट 6, 7 और 8 से हो रहा भारी प्रदूषण है। 50 mg/Nm³ की तय सीमा के मुकाबले, यूनिट 6 से 87 mg/Nm³, यूनिट 7 से 85 mg/Nm³, और यूनिट 8 से 91 mg/Nm³ पार्टिकुलेट मैटर (PM) का उत्सर्जन पाया गया। यह तय मानक से काफी ज्यादा है। इसके अलावा, इन यूनिट्स का 'Consent to Operate' दिसंबर 2024 में ही एक्सपायर हो चुका था, यानी ये एक साल से भी ज्यादा समय से बिना वैध परमिट के चल रही थीं। फैक्ट्री से रिसता हुआ केमिकल और बिना ट्रीटमेंट के सीवेज का पानी पास के नालों और जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा था। इन्हीं गंभीर गड़बड़ियों के चलते CPCB ने MPCB को तत्काल इन यूनिट्स को बंद करने का निर्देश दिया है।

देश में बढ़ते पर्यावरण दबाव का संकेत

PTPS पर हुई यह कार्रवाई देश के थर्मल पावर सेक्टर में बढ़ते पर्यावरण नियमों के दबाव को दर्शाती है। PTPS में नियमों का उल्लंघन कोई नई बात नहीं है। जुलाई 2015 में ही एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम को लेकर पहली बार नोटिस जारी हुआ था। 2018 के निरीक्षण में भी PM उत्सर्जन की अधिकता पाई गई थी, जिसके बाद मई 2018 में CPCB ने इन यूनिट्स को बंद करने का आदेश भी दिया था। लेकिन एक्सपायर्ड परमिट के साथ इन्हें चलाते रहना, सिस्टम की बड़ी खामियों और अनदेखी को उजागर करता है। ऐसा ही मामला पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (Panipat TPS) का है, जिसे पर्यावरण नुकसान के लिए ₹6.90 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना भरना पड़ा था। वहीं, रूपनगर थर्मल प्लांट (Ropar Thermal Plant) को ₹5 करोड़ का जुर्माना और 'Consent to Operate' वापस लेने की कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। ये घटनाएं दिखाती हैं कि पूरे देश में थर्मल पावर प्लांट्स पर प्रदूषण कंट्रोल टेक्नोलॉजी में भारी निवेश का दबाव बढ़ रहा है। महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO), जो PTPS की पैरेंट कंपनी है, भारत की एक बड़ी पावर जनरेशन कंपनी है। हालांकि, इसे पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं को लेकर जांच का सामना करना पड़ा है। World Benchmarking Alliance ने इसे जलवायु लक्ष्यों की कमी के कारण 'Uncommitted' रेटिंग दी है। MAHAGENCO ने IRFC से ₹5,000 करोड़ का लोन भी लिया है, जो इसके बड़े ऑपरेशन्स और जिम्मेदारियों को दिखाता है।

MAHAGENCO के लिए बढ़ती चिंताएं

Parli Thermal Power Station में बार-बार हो रहे पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से MAHAGENCO की कंप्लायंस (compliance) को लेकर गंभीरता और कंपनी की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी (viability) पर सवाल खड़े हो रहे हैं। CPCB का यह निर्देश सिर्फ एक छोटी-मोटी प्रक्रियात्मक दिक्कत नहीं, बल्कि लापरवाही का गंभीर नतीजा है। दो यूनिट्स के बंद होने के अलावा, कंपनी पर भारी भरकम जुर्माने का खतरा भी मंडरा रहा है। 2019 से ऐश डाइक्स (ash dykes) के लिए जरूरी सालाना थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट न होना, और वेस्ट ऑयल स्टोरेज में हुई गड़बड़ियां, सिस्टमैटिक फेलियर (systematic failure) और पर्यावरण जोखिम को कम करने में कंपनी की विफलता को दर्शाती हैं। MAHAGENCO की 'Uncommitted' रेटिंग बताती है कि कंपनी के पास अभी स्पष्ट एमिशन रिडक्शन स्ट्रेटेजी (emission reduction strategy) नहीं है। इसके अलावा, कंपनी की कोयला खदानों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पर्यावरण मंजूरी (environmental clearance) मिलने में आने वाली ऐतिहासिक दिक्कतें, ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) और रेगुलेटरी ट्रस्ट (regulatory trust) को कमजोर करती हैं।

आगे क्या?

PTPS की यूनिट 6 और 8 का भविष्य अब पूरी तरह से सुधारात्मक कार्रवाई (corrective actions) और पर्यावरण अथॉरिटीज से दोबारा मंजूरी मिलने पर निर्भर करेगा। MAHAGENCO को अपनी पर्यावरण प्रबंधन प्रणालियों (environmental management systems) की तुरंत समीक्षा करनी होगी और उन्हें बेहतर बनाना होगा। कंपनी को मौजूदा उत्सर्जन मानकों को पूरा करने और अपने ऑपरेटिंग परमिट के अनुपालन के लिए प्रदूषण नियंत्रण तकनीकों (pollution control technologies) में भारी निवेश करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो कंपनी को और भी बड़े रेगुलेटरी पेनाल्टी (regulatory penalties), ऑपरेशनल डिस्टर्बेंस (operational disturbances) और खराब इमेज (reputation) का सामना करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री में बढ़ती डिकार्बोनाइजेशन (decarbonization) की ओर झुकाव और कड़े पर्यावरण नियमों को देखते हुए, नॉन-कंप्लायंस (non-compliance) का जोखिम लगातार बढ़ेगा।

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