MRPL ने अपने क्रूड ऑयल प्रोक्योरमेंट के लिए 'delivered-at-port' कॉन्ट्रैक्ट्स का रास्ता चुना है। इस बदलाव से कंपनी मिडल ईस्ट में समुद्री जोखिमों से बचेगी। साथ ही, कंपनी ने हाल ही में अपने शानदार Q2 FY2027 नतीजे पेश किए हैं और कर्ज में भी भारी कटौती की है।
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने कर्नाटक में स्थित अपनी 300,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए अपनी सप्लाई चेन में बड़े बदलाव किए हैं। अब कंपनी पारंपरिक शिपिंग कॉन्ट्रैक्ट्स से हटकर 'delivered-at-port' (DAP) एग्रीमेंट्स की ओर बढ़ रही है। इसके तहत अब कार्गो डिलीवरी की जिम्मेदारी सप्लायर्स की होगी, जिससे रिफाइनरी को होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अस्थिर क्षेत्रों में बढ़ते माल भाड़े और इंश्योरेंस प्रीमियम के झटकों से राहत मिलेगी।
यह कदम कंपनी को ग्लोबल संघर्षों से पैदा होने वाले समुद्री जोखिमों से बचाने के लिए उठाया गया है। इससे प्रोक्योरमेंट कॉस्ट स्थिर रहेगी और ऑपरेशन्स पर भू-राजनीतिक तनावों का असर कम होगा।
फाइनेंशियल और ऑपरेशनल मजबूती
MRPL ने इस बदलाव के साथ ही अपनी बैलेंस शीट को भी काफी मजबूत किया है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹1,881 करोड़ रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹639 करोड़ था। कंपनी ने पिछले छह महीनों में अपना कर्ज ₹5,000 करोड़ से ज्यादा घटाया है।
कंपनी ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों में भी विविधता लाई है। हालिया तिमाही में कंपनी की 1/3 आपूर्ति रूस से आई, जबकि 1/5 हिस्सा मिडल ईस्ट से प्राप्त हुआ। बाकी तेल अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका और घरेलू स्रोतों से हासिल किया गया।
मार्केट का मिजाज
4 नवंबर, 2026 तक, MRPL का शेयर ₹186 के आसपास ट्रेड कर रहा है। हालांकि कंपनी ने रिस्क कम करने के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट्स अपनाए हैं, लेकिन निवेशकों को क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिफाइनिंग मार्जिन पर नजर रखनी होगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया मॉडल लंबी अवधि में कंपनी के मुनाफे को कैसे सुरक्षित रखता है।
