मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने जून तिमाही में **₹946 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में हुए घाटे से यह एक बड़ी वापसी है। मजबूत नतीजों के दम पर शेयर **13%** उछले, जिसका मुख्य कारण रिफाइनरी का बढ़ा हुआ प्रोसेसिंग वॉल्यूम रहा।
मुनाफे का यह कमाल कैसे हुआ?
मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के शेयर गुरुवार, 16 जुलाई को 13% की छलांग लगाकर ₹178.40 पर पहुंच गए। इसकी वजह कंपनी की 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के नतीजे थे। कंपनी ने ₹946 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया, जो पिछले साल की इसी तिमाही में ₹271 करोड़ के नेट लॉस की तुलना में एक शानदार वापसी है।
रिफाइनरी के ऑपरेशन से होने वाली आमदनी (Revenue from operations) में भारी उछाल देखा गया, जो पिछले साल के ₹20,989 करोड़ से बढ़कर 98% से अधिक होकर ₹41,609 करोड़ तक पहुंच गई। कंपनी की ऑपरेटिंग प्रॉफिटेबिलिटी (EBITDA) भी ₹218 करोड़ से बढ़कर ₹1,860 करोड़ हो गई।
ऑपरेशनल स्थिति और बाजार के फैक्टर
कंपनी को इस शानदार परफॉर्मेंस का फायदा इसलिए मिला क्योंकि उसने वेस्ट एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर बढ़े हुए मार्जिन, जिन्हें 'क्रैक स्प्रेड' कहा जाता है, का पूरा फायदा उठाया। हालांकि, बिक्री की ऊंची लागत (Higher costs of sales) के कारण कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर थोड़ा दबाव देखा गया, जिससे EBITDA उम्मीद से कुछ कम रहा।
वैल्यूएशन और भविष्य की संभावनाओं की बात करें तो बाजार के एनालिस्ट्स अभी भी थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं। टेक्निकल चार्ट्स पर ₹165 के लेवल को तोड़ने के बाद कुछ तेजी के संकेत मिले हैं, लेकिन प्रोफेशनल ब्रोकरेज फर्म्स का नजरिया अभी भी मिला-जुला है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शेयर पर 'होल्ड' रेटिंग बनी हुई है और 2028 फाइनेंशियल ईयर के लिए 6.0x EV/EBITDA मल्टीपल के आधार पर टारगेट प्राइस में कुछ बदलाव किए गए हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) के असर के कारण आने वाली तिमाहियों में मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
निवेशक सिर्फ मौजूदा प्रॉफिट के आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि कुछ और बातों पर भी ध्यान देंगे। कंपनी के भविष्य की केमिकल्स प्रोजेक्ट की प्रगति एक अहम फैक्टर होगी, जिसके कमर्शियल प्रोडक्शन में अभी कई साल बाकी हैं। इसके अलावा, कंपनी की मजबूत मार्जिन बनाए रखने की क्षमता ग्लोबल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिफाइंड प्रोडक्ट्स पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से जुड़ी सरकारी नीतियों में किसी भी बदलाव पर निर्भर करेगी। आने वाली तिमाहियों में शेयरहोल्डर्स के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कंपनी मौजूदा प्रोसेसिंग लेवल को बनाए रख पाती है या नहीं और अपने ऑपरेशनल खर्चों को कैसे मैनेज करती है।
