मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (MRPL) ने Q1 FY27 के लिए ₹13.2 अरब का EBITDA दर्ज किया है, जो बाजार की उम्मीदों से कम रहा। हालांकि, कम टैक्स रेट के चलते कंपनी के नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
कच्चे तेल के बढ़ते दाम का असर
मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने वितीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (EBITDA) ₹13.2 अरब रहा। यह आंकड़ा बाजार विश्लेषकों की उम्मीदों से थोड़ा कम है। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रही हैं, जिस पर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों ने और दबाव डाला है। इससे रिफाइनरी के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ गई है।
टैक्स में छूट से चमके नतीजे
ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर दबाव के बावजूद, कंपनी के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में शानदार सुधार देखा गया। कंपनी ने ₹5.6 अरब का एडजस्टेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स दर्ज किया। यह पिछले वितीय वर्ष की चौथी तिमाही के ₹1.2 अरब के प्रॉफिट और पिछले साल की इसी तिमाही के ₹2.7 अरब के घाटे के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। इस बढ़ोतरी का बड़ा श्रेय नई टैक्स संरचना अपनाने के बाद कंपनी को मिली कम इफेक्टिव टैक्स रेट को जाता है। हालांकि, यह मुनाफा ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव के बावजूद हुआ है, जो टैक्स में बदलावों के असर को दर्शाता है।
रिफाइनिंग मार्जिन और ऑपरेशनल डेटा
कंपनी ने 4.4 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल को प्रोसेस किया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 1.8% और पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 25.9% ज्यादा है। लेकिन, ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (पेट्रोलियम उत्पादों का मूल्य और कच्चे माल की लागत का अंतर) घटकर USD 8.3 प्रति बैरल रह गया। यह पिछली तिमाही के USD 11.2 प्रति बैरल से कम है। सरकार द्वारा लगाए गए स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) का असर रिफाइनिंग मार्जिन पर लगातार दिख रहा है, जिससे प्रति बैरल रिफाइनिंग की लाभप्रदता कम हो रही है।
भविष्य की राह
आगे चलकर, विश्लेषकों को उम्मीद है कि अगले दो सालों में रिफाइनिंग मार्जिन लगभग USD 7.4 से 7.8 प्रति बैरल के बीच रह सकता है। कंपनी के आने वाले केमिकल्स प्रोजेक्ट को लंबी अवधि के विकास के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि इसके चालू होने में अभी कई साल लगेंगे। फिलहाल, निवेशक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, सरकारी एक्साइज ड्यूटी में बदलावों के मार्जिन पर असर और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की क्षमता पर नजर बनाए रखेंगे।
