मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ₹915 करोड़ का मुनाफा कमाया है। यह पिछले साल की इसी अवधि में हुए ₹272 करोड़ के घाटे से एक बड़ा सुधार है। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की मुख्य वजह कच्चे तेल की प्रोसेसिंग में हुई भारी बढ़ोतरी और नए टर्मिनलों पर उत्पाद वितरण का विस्तार है।
मुनाफे में कैसे आई कंपनी?
MRPL ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत दमदार तरीके से की है। 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही में, कंपनी ने ₹915 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹272 करोड़ का घाटा हुआ था।
रेवेन्यू और ऑपरेशन्स में बड़ी तेजी
कंपनी के रेवेन्यू में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है। यह लगभग दोगुना होकर ₹41,609 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹20,989 करोड़ था। इस ग्रोथ का मुख्य कारण कच्चे तेल की प्रोसेसिंग वॉल्यूम में वृद्धि है। कंपनी ने इस तिमाही में 4.43 मिलियन टन कच्चे तेल को प्रोसेस किया, जबकि पिछले साल पहली तिमाही में यह 3.52 मिलियन टन था। कंपनी का EBITDA भी बढ़कर ₹1,860 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹218 करोड़ था।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विस्तार पर फोकस
MRPL अपनी लॉजिस्टिक्स क्षमताओं का विस्तार कर रही है। कंपनी को हाल ही में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) से देवंगोंथी टर्मिनल को बेंगलुरु के केम्पेगौडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल पाइपलाइन के निर्माण की मंजूरी मिली है। इसके अलावा, कंपनी ने मंगलुरु, हिंदूपुर और एन्नोर जैसे टर्मिनलों पर उत्पाद लोडिंग ऑपरेशंस शुरू करके अपने वितरण नेटवर्क का विस्तार किया है।
कंपनी ने प्रमुख बंदरगाहों पर स्टोरेज टैंक के लिए लीज एग्रीमेंट भी किए हैं, जिनमें नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी, काकीनाडा और कृष्णापटनम शामिल हैं। इससे कंपनी को अपनी सप्लाई चेन को मैनेज करने में और अधिक लचीलापन मिलेगा।
स्थिरता और भविष्य की राह
पर्यावरण के अनुकूल ईंधन की ओर बढ़ते रुझान के तहत, MRPL ने सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) के क्षेत्र में भी प्रगति की है। कंपनी को अप्रैल 2026 में इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल से संबंधित अपनी प्रक्रिया के लिए ISCC CORSIA सर्टिफिकेशन मिला है। यह सर्टिफिकेशन अंतरराष्ट्रीय सस्टेनेबल फ्यूल मार्केट्स में भाग लेने के लिए जरूरी है।
निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अपनी लागत संरचना और मांग को कैसे प्रबंधित करती है। हालांकि वर्तमान तिमाही के नतीजे परिचालन विस्तार में सफलता दिखाते हैं, रिफाइनिंग सेक्टर में लाभप्रदता अभी भी रिफाइनिंग मार्जिन पर निर्भर करती है, जो अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों और विनिमय दरों से प्रभावित हो सकती है। भविष्य में, नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स के कार्यान्वयन की समय-सीमा और बढ़ी हुई टर्मिनल क्षमता से दीर्घकालिक मार्जिन में स्थायी सुधार होगा या नहीं, यह प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहेगा।
