MRPL Share: डीजल की भारी मांग से दौड़ी रिफाइनरी! कैपेसिटी के 108% पर कामकाज, मुनाफे में शानदार वापसी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
MRPL Share: डीजल की भारी मांग से दौड़ी रिफाइनरी! कैपेसिटी के 108% पर कामकाज, मुनाफे में शानदार वापसी

MRPL की रिफाइनरी अब अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा यानी **108%** पर काम कर रही है। डीजल की जबरदस्त डिमांड के चलते कंपनी ने Q1 फाइनेंशियल ईयर 2027 में **₹914.82 करोड़** का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले साल के घाटे से एक बड़ी रिकवरी है।

उत्पादन में रिकॉर्ड तेजी

कंपनी अपनी रिफाइनरी को 105% से 108% के बीच की यूटिलाइजेशन दर पर चला रही है। इस हाई-इंटेंसिटी कामकाज का मुख्य कारण घरेलू और क्षेत्रीय बाजारों में डीजल की बढ़ती मांग है। बेहतर मार्जिन हासिल करने के लिए कंपनी ने अपने प्रोडक्शन सेटअप में बदलाव किया है और जेट फ्यूल की तुलना में डीजल जैसे मिडिल डिस्टिलेट्स को प्राथमिकता दी है।

फाइनेंशियल टर्नअराउंड

इस रणनीति का असर कंपनी की बैलेंस शीट पर भी दिखा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹914.82 करोड़ रहा है। वहीं, पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी को ₹272 करोड़ का नुकसान हुआ था। इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹41,609 करोड़ दर्ज किया गया है।

ऑपरेशनल मजबूती और सपोर्ट

रिफाइनरी की सबसे बड़ी ताकत उसकी तकनीकी लचीलापन है। यह प्लांट 16 से 48 API ग्रेविटी तक के क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने में सक्षम है। सप्लाई चेन में किसी भी बाधा से बचने के लिए कंपनी ने ONGC से $500 मिलियन की पैरेंट गारंटी ली है, जिससे सऊदी अरामको (Saudi Aramco) से अगस्त 2028 तक कच्चे तेल का आयात आसान हो गया है।

निवेशकों के लिए जोखिम (Key Risks)

इतने शानदार आंकड़ों के बावजूद निवेशकों को कुछ चुनौतियों पर नजर रखनी चाहिए। सबसे बड़ी चिंता कंपनी का हाई डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और क्रैक स्प्रेड्स का सीधा असर मुनाफे पर पड़ता है। बाजार अब यह देख रहा है कि क्या कंपनी कर्ज के बोझ के बीच इस हाई यूटिलाइजेशन लेवल को लंबे समय तक बरकरार रख पाएगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.