नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने सोलर PV सेल के लिए Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) से छूट के आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर **23 जुलाई, 2026** कर दिया है। यह फैसला उन रिन्यूएबल डेवलपर्स को बड़ी राहत देगा जो प्रोजेक्ट कंप्लायंस को लेकर संघर्ष कर रहे थे और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग के नियमों के तहत पेनल्टी से बचना चाहते थे।
डेवलपर्स और मैन्युफैक्चरर्स के लिए क्या है मायने?
MNRE ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट डेवलपर्स के लिए सोलर फोटोवोल्टिक सेल के Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) से छूट पाने के लिए एक नया मौका खोला है। पहले यह आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून, 2026 थी, जिसे अब बढ़ाकर 23 जुलाई, 2026 कर दिया गया है। यह कदम डेवलपर्स के अनुरोधों के बाद उठाया गया है और इसका मकसद स्थानीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ मौजूदा रिन्यूएबल एनर्जी निवेशों की सुरक्षा करना है।
ALMM नियम, जो 1 जून, 2026 से लागू हुआ था, के तहत डेवलपर्स को सरकारी अनुमोदित निर्माताओं से ही सोलर PV सेल खरीदना अनिवार्य है। हालांकि, मंत्रालय नेट-मीटरिंग और ओपन-एक्सेस प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष मामलों में छूट की अनुमति देकर पावर डेवलपर्स की जरूरतों और घरेलू विनिर्माण उद्योग के विकास के बीच संतुलन बना रहा है। डेवलपर्स को इससे अपने खरीद प्लान को व्यवस्थित करने के लिए महत्वपूर्ण समय मिल गया है, जिससे प्रोजेक्ट में तुरंत देरी नहीं होगी। वहीं, घरेलू सोलर निर्माताओं के लिए, ALMM पॉलिसी आयातित कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करने के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है।
डोमेस्टिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग में ट्रेंड्स
हाल के समय में, भारत के डोमेस्टिक सोलर उद्योग ने उत्पादन क्षमता में तेजी से विस्तार देखा है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 2026 की पहली तिमाही में लगभग 5 गीगावाट सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी गई। यह विकास 2023 में 2.3 गीगावाट से बढ़कर 2024 में 8 गीगावाट तक पहुंचा, और 2025 के लिए 20.4 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। यह विस्तार भारत के महत्वाकांक्षी रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यह क्षेत्र की अनुकूल रेगुलेटरी नीतियों और सरकारी समर्थन पर निर्भरता को भी उजागर करता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
हालांकि यह समय सीमा विस्तार अल्पकालिक राहत प्रदान करता है, निवेशकों के लिए मुख्य चुनौती घरेलू सोलर सेल की लागत और उपलब्धता बनी हुई है, खासकर वैश्विक विकल्पों की तुलना में। जिन प्रोजेक्ट्स की योजना कम लागत वाले आयातित इनपुट्स के आधार पर बनाई गई थी, उन्हें मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ सकता है यदि उन्हें अंततः ALMM फ्रेमवर्क के तहत घरेलू आपूर्तिकर्ताओं पर स्विच करना पड़े। निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या सरकार ऐसे ग्रेस पीरियड जारी रखती है या अंततः ALMM सूची के सख्त प्रवर्तन की ओर बढ़ती है। इसके अतिरिक्त, बड़े पैमाने पर यूटिलिटी प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग टाइमलाइन और घरेलू सेल फैक्ट्री यूटिलाइजेशन की गति महत्वपूर्ण मेट्रिक्स होंगी। घरेलू निर्माताओं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण बनाए रखते हुए कुशलतापूर्वक उत्पादन बढ़ाने की क्षमता ही अंततः इस पॉलिसी की दीर्घकालिक सफलता निर्धारित करेगी।
