Karnataka में ₹83,480 करोड़ का बड़ा निवेश! डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाएगी iPC

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Karnataka में ₹83,480 करोड़ का बड़ा निवेश! डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाएगी iPC

लक्ज़मबर्ग की इनोवेशन प्लेटफॉर्म कैपिटल (iPC) ने कर्नाटक में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ₹83,480 करोड़ के निवेश से एक इंटीग्रेटेड डेटा सेंटर और ग्रीन हाइड्रोजन हब बनाने का प्रस्ताव दिया है। यह बड़े पैमाने का प्राइवेट निवेश भारत के डिजिटल और रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।

कर्नाटक में ₹83,480 करोड़ का महाप्रोजेक्ट

लक्ज़मबर्ग की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी, इनोवेशन प्लेटफॉर्म कैपिटल (iPC), ने कर्नाटक सरकार के सामने एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है। कंपनी ₹83,480 करोड़ का भारी निवेश करके एक बड़ा इंटीग्रेटेड फैसिलिटी बनाने की योजना बना रही है, जिसमें हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स और ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन शामिल होगा। यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु और तुमकुर के बीच तीन फेज़ में पूरा किया जाएगा। पहले फेज़ में ₹17,114 करोड़ खर्च होंगे, जिससे 400 MW की डेटा सेंटर क्षमता और 500 MW का ग्रीन हाइड्रोजन और पावर कॉम्प्लेक्स तैयार होगा।

प्रोजेक्ट का पैमाना और संसाधन

इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य बहुत बड़ा है। डेटा सेंटर्स के लिए कुल 2,250 MW का आईटी लोड और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 1,000 MW की क्षमता रखी गई है। इन सबको सपोर्ट करने के लिए iPC ने राज्य सरकार से 1,000 एकड़ ज़मीन की मांग की है। प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा पानी की ज़रूरत है, जो प्रतिदिन 1.3 करोड़ लीटर (13 MLD) बताई गई है। इसके लिए कंपनी ने एक सस्टेनेबल मॉडल पेश किया है, जिसमें ट्रीटेड इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट (प्रदूषित औद्योगिक पानी) और रीसाइक्लिंग सिस्टम का इस्तेमाल होगा। यह सिस्टम 80 से 85% तक पानी को रिकवर करेगा। पानी की कमी को देखते हुए, यह रीसाइक्लिंग प्लान प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा है।

निवेशकों के लिए सेक्टर का नज़रिया

हालांकि iPC एक प्राइवेट कंपनी है और भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड नहीं है, लेकिन यह प्रस्ताव भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की बढ़ती रफ्तार को दिखाता है। हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स और ग्रीन हाइड्रोजन का एक साथ होना, आज की भारतीय इंडस्ट्रियल पॉलिसी के दो बड़े थीम्स को दर्शाता है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के बढ़ने से डेटा सेंटर्स की मांग तेज़ी से बढ़ रही है, वहीं ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए सरकार की प्राथमिकता है। जो निवेशक बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और डिजिटल सर्विसेज सेक्टर पर नज़र रखते हैं, उनके लिए इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट की सेहत और रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की रफ़्तार का अंदाज़ा देते हैं।

जोखिम और चुनौतियाँ

किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए, प्रस्ताव से लेकर पूरा होने तक का सफ़र काफी पेचीदा होता है। इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ा जोखिम ज़मीन अधिग्रहण है, जिसमें भारत में लंबी कानूनी और रेगुलेटरी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, बड़े पैमाने पर ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन अभी भी वैश्विक स्तर पर अपनी कमर्शियल व्यवहार्यता के शुरुआती दौर में है। प्रोजेक्ट की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी रेगुलेटरी क्लियरेंस कैसे हासिल करती है, बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर को कैसे मैनेज करती है, और क्या वह पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में हाइड्रोजन उत्पादन को किफ़ायती साबित कर पाती है। ट्रीटेड इंडस्ट्रियल एफ्लुएंट पर निर्भरता भी लॉजिस्टिकल चुनौतियां खड़ी कर सकती है। अब आगे राज्य सरकार की रिव्यू कमेटियां ज़मीन आवंटन और संसाधन प्रबंधन के दावों की जांच करेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.