Larsen & Toubro ने अपनी इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 1 GW तक बढ़ाने की योजना को फिलहाल टाल दिया है। कंपनी गुजरात में अपने मौजूदा 400 MW प्लांट पर ही फोकस करेगी।
Larsen & Toubro (L&T) ने अपनी इलेक्ट्रोलाइज़र मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 1 GW तक ले जाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को होल्ड पर डाल दिया है। कंपनी ने यह कदम ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में उम्मीद से धीमी मांग को देखते हुए एक सतर्क रणनीति के तहत उठाया है।
निवेश और क्षमता की स्थिति
फिलहाल कंपनी गुजरात के हजीरा में 400 MW का प्रोडक्शन प्लांट चला रही है, जो 'प्रेशराइज्ड अल्कलाइन टेक्नोलॉजी' पर आधारित है। L&T का लक्ष्य मार्च 2027 तक क्षमता को 1 GW तक पहुंचाने का था, जिसके लिए ₹450 करोड़ से ₹550 करोड़ का बजट तय किया गया था। कंपनी ने अब तक इस प्रोजेक्ट में करीब ₹293 करोड़ का निवेश किया है। इस विस्तार को रोकने के पीछे कंपनी का मकसद अतिरिक्त क्षमता बनाकर जोखिम लेने से बचना है।
मार्केट की सच्चाई और लचीलापन
मैनेजमेंट का कहना है कि यह सेक्टर से बाहर निकलने का रास्ता नहीं है, बल्कि एक 'स्ट्रैटेजिक पॉज' है। वर्तमान में गुजरात का प्लांट घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स में लागत और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, L&T ने यह स्पष्ट किया है कि यदि मार्केट की स्थितियां सुधरती हैं, तो वे 12 से 18 महीने के भीतर क्षमता विस्तार को फिर से पटरी पर ला सकते हैं।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
निवेशकों को अब मार्केट में नए ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट्स के ऐलान पर नजर रखनी चाहिए। चूँकि ऐसे प्रोजेक्ट्स को शुरू होने में 3 से 4 साल का समय लगता है, इसलिए L&T का यह फैसला कंपनी के मार्जिन और कैश फ्लो को सुरक्षित रखने के लिए सही माना जा सकता है। आने वाले समय में औद्योगिक ग्राहकों के साथ होने वाले नए ऑफ-टेक समझौते ही इस विस्तार के दोबारा शुरू होने का संकेत देंगे।
