केरल में बिजली की मांग रिकॉर्ड **9.47 करोड़** यूनिट के स्तर पर पहुंच गई है, जिसके चलते स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को पीक ऑवर्स में कटौती करनी पड़ रही है। लंबी अवधि के अनुबंधों की जगह महंगे स्पॉट मार्केट से बिजली खरीदने के कारण राज्य पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है, जिसका असर वहां स्थित कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है।
केरल का पावर ग्रिड इस समय भारी तनाव में है क्योंकि राज्य रिकॉर्ड बिजली खपत का सामना कर रहा है। 8 सितंबर को दैनिक मांग 9.47 करोड़ यूनिट के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। गर्मी बढ़ने और मानसून की बारिश कम होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है, जिससे केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को शाम 6:00 बजे से रात 1:00 बजे के बीच बिजली कटौती लागू करनी पड़ी है।
यह संकट मांग और उत्पादन के बीच बढ़ते अंतर के कारण है। राज्य का अपना उत्पादन कुल जरूरत का केवल एक छोटा हिस्सा ही पूरा कर पा रहा है, जिसके कारण उसे नेशनल पावर एक्सचेंज पर निर्भर होना पड़ रहा है। यह एक महंगा सौदा है—जहाँ पुराने एग्रीमेंट्स के तहत बिजली ₹4.29 प्रति यूनिट मिल रही थी, वहीं अब स्पॉट मार्केट में इसके दाम ₹10 से ₹14 प्रति यूनिट तक पहुंच गए हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Alert)
केरल में काम करने वाली मैन्युफैक्चरिंग और भारी इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। पहला जोखिम उत्पादन में देरी का है, क्योंकि बिजली कटौती से काम प्रभावित हो रहा है। दूसरा, यदि कंपनियां बैकअप के लिए डीजल जनरेटर का उपयोग करती हैं, तो उनकी ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर आने वाली तिमाहियों के नेट प्रॉफिट पर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, राज्य में जलाशयों का जलस्तर क्षमता का महज 63.55% रह गया है, जबकि पिछले साल यह 80.03% था। देश भर में 12,000 मेगावाट की बिजली कमी के कारण अन्य राज्यों से अतिरिक्त बिजली खरीदना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार ने 15 सितंबर तक आपूर्ति स्थिर करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह पूरी तरह से मानसून और मौसम पर निर्भर है।
