केरल में बिजली का गहराता संकट: न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव पर होगी जनता की राय

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
केरल में बिजली का गहराता संकट: न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव पर होगी जनता की राय

केरल भारी बिजली की कमी से जूझ रहा है, जहां मांग **4,800 MW** तक पहुंच गई है और जलविद्युत भंडार सिर्फ **28%** रह गया है। सरकार का कहना है कि चेमेनी में किसी भी न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले जनता और राजनीतिक दलों से व्यापक विचार-विमर्श करना होगा।

केरल में बिजली की भारी किल्लत

केरल इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। राज्य में बिजली की मांग बढ़कर 4,700-4,800 MW तक पहुंच गई है, जो पिछले साल की इसी अवधि के 3,500-3,600 MW से काफी ज्यादा है। राज्य अपनी कुल जरूरत का केवल 17% ही अंदरूनी तौर पर पैदा कर पा रहा है। ऐसे में, सरकार लंबे समय के समाधानों पर विचार कर रही है, जिसमें कासरगोड के चेमेनी में एक संभावित न्यूक्लियर पावर प्लांट भी शामिल है। हालांकि, बिजली मंत्री सन्नी जोसेफ ने साफ किया है कि ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट पर जनता, राजनीतिक दलों और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ पूरी बातचीत के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा।

जलविद्युत भंडार में भारी गिरावट का असर

ऊर्जा की यह कमी काफी हद तक जलविद्युत पर निर्भरता के कारण है, जो खराब मॉनसून की बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुई है। जलविद्युत जलाशयों का स्तर गिरकर 28% पर आ गया है, जबकि पिछले साल इसी समय यह 60% था। यह भारी गिरावट, बढ़ते तापमान और घरों के उपकरणों व इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की बढ़ी हुई खपत के साथ मिलकर केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) पर भारी दबाव डाल रही है। इस तात्कालिक कमी को पूरा करने के लिए, राज्य को ऊंचे बाजार भाव पर अल्पावधि में बिजली खरीदनी पड़ रही है।

लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

संकट का वित्तीय प्रभाव पावर परचेज एग्रीमेंट (Power Purchase Agreement) के मुद्दों और भंडारण की सीमाओं से और बढ़ गया है। राज्य सुप्रीम कोर्ट में एक पुराने दीर्घकालिक समझौते को रद्द करने को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, जिससे ₹4.29 प्रति यूनिट की कम लागत पर बिजली मिल सकती थी। इसके अलावा, राज्य अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) में निवेश तो कर रहा है, लेकिन सौर ऊर्जा का उपयोग अपर्याप्त बैटरी स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण सीमित है। इस वजह से राज्य को रात में लगभग ₹10 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ रही है, जो दिन के समय सौर ऊर्जा की लागत से काफी ज्यादा है।

संरक्षण और भविष्य की रणनीति

आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए, सरकार ने निवासियों से आग्रह किया है कि वे पीक आवर्स (Peak Hours) के दौरान गैर-जरूरी बिजली के उपयोग को कम करें। ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जैसे एयर कंडीशनर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पर स्टैंडर्ड रखने की सलाह देना। मौजूदा संकट के बावजूद, राज्य ग्रिड स्थिरता बनाए रखने के लिए अन्य राज्यों से उधार ली गई बिजली का भुगतान कर रहा है। निवेशकों और हितधारकों को रद्द किए गए पावर परचेज एग्रीमेंट से संबंधित कानूनी कार्यवाही की प्रगति और चेमेनी साइट के लिए किसी भी औपचारिक प्रोजेक्ट प्रस्ताव की समय-सीमा पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सीधे राज्य की दीर्घकालिक बिजली लागत और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.