Kerala Power Crisis: राज्य में गहराया बिजली संकट, 1,000 MW की कमी से जारी रहेगा लोड शेडिंग

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AuthorAditya Rao|Published at:
Kerala Power Crisis: राज्य में गहराया बिजली संकट, 1,000 MW की कमी से जारी रहेगा लोड शेडिंग

केरल में बिजली की भारी किल्लत बनी हुई है। कम बारिश और बढ़ती मांग के चलते राज्य का ग्रिड दबाव में है। जलाशयों का स्तर **63.75%** तक गिर गया है, और **1,000 MW** की दैनिक कमी के कारण सरकार ने फिलहाल बिजली कटौती जारी रखने का फैसला किया है।

संकट की मुख्य वजहें

केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) फिलहाल 900 MW से 1,000 MW के बीच की दैनिक कमी से जूझ रहा है। राज्य के बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने साफ कर दिया है कि आम जनता और कारोबारियों को फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद कम है। इस संकट की सबसे बड़ी वजह मानसून की 26% कम बारिश है, जिसका सीधा असर हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन पर पड़ा है। जलाशयों में पानी का स्तर घटकर 63.75% रह गया है, जबकि पीक ऑवर में बिजली की मांग 5,450 MW तक पहुंच रही है।

महंगे सौदे और आर्थिक बोझ

अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार को बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच KSEB ने बिजली खरीद पर लगभग ₹1,190 करोड़ खर्च किए हैं। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब स्पॉट मार्केट में बिजली की कीमतें ₹30 प्रति यूनिट तक उछल जाती हैं, जो राज्य के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है।

भविष्य की चुनौतियां

केंद्र सरकार ने 15 सितंबर 2026 को केरल को 150 MW अतिरिक्त बिजली आवंटित की थी, लेकिन यह कुल कमी के मुकाबले काफी कम है। बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण ग्रिड की स्थिरता पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, राज्य सरकार का पूरा दारोमदार पावर-स्वैप एग्रीमेंट्स और बाहरी बाजार पर है, ताकि ग्रिड फेलियर से बचा जा सके।

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