अक्टूबर 2026 के अंत में आठ साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल पर डीलर कमीशन बढ़ाया गया था, लेकिन Kerala के फ्यूल डीलर्स इससे संतुष्ट नहीं हैं। All Kerala Federation of Petroleum Traders का कहना है कि बिजली और लेबर की बढ़ती लागत ने इस राहत को पूरी तरह बेअसर कर दिया है।
राहत क्यों नाकाफी है?
All Kerala Federation of Petroleum Traders (AKFPT) के अनुसार, अक्टूबर 2026 में हुई कमीशन की बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। इस बदलाव में पेट्रोल पर 65 पैसे प्रति लीटर और डीजल पर 44 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। डीलर्स का तर्क है कि आठ साल के लंबे इंतजार के बाद मिली यह मामूली राहत आज के दौर के महंगाई और ऑपरेशनल खर्चों के सामने बहुत कम है।
बढ़ते ऑपरेशनल खर्च का संकट
पेट्रोल पंप ऑपरेटरों के लिए बिजली बिल, लेबर की न्यूनतम मजदूरी और जमीन का किराया जैसे फिक्स्ड खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। फेडरेशन का कहना है कि अगर समय-समय पर कमीशन में सुधार नहीं किया गया, तो छोटे और स्वतंत्र पेट्रोल पंपों का कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। साथ ही, पेट्रोल के वाष्पीकरण (evaporation) से होने वाला नुकसान भी उनके मुनाफे पर चोट करता है।
नई मांगे और सुरक्षा का मुद्दा
डीलर्स ने अब एक 'Pump Protection Act' की मांग तेज कर दी है। इसका मकसद पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और रात की शिफ्ट में सुरक्षा मानकों को कड़ा करना है। इसके अलावा, ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की नई स्टेशन खोलने की पॉलिसी पर भी सवाल उठाए गए हैं। डीलर्स का कहना है कि बिना किसी ठोस 'वायबिलिटी असेसमेंट' के नए पंप खोलने से नेटवर्क की डेंसिटी बढ़ रही है, जिससे पुराने पंपों की कमाई प्रभावित हो रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह विवाद सीधे तौर पर Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी बड़ी ओएमसी कंपनियों से जुड़ा है। अगर डीलर्स की समस्याएं बढ़ती हैं, तो इसका असर सर्विस लेवल और नेटवर्क की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे ओएमसी कंपनियां अपनी विस्तार रणनीति और डीलर संबंधों के बीच संतुलन बनाती हैं, खासकर जब सेक्टर में लॉन्ग-टर्म एनर्जी ट्रांजिशन का दबाव भी बना हुआ है।
