केरल में बिजली संकट गहरा गया है। राज्य में रोजाना **1,000 MW** की बिजली कमी के चलते लोड शेडिंग करनी पड़ रही है। बढ़ती मांग और कमजोर मॉनसून के कारण सरकार अब इमरजेंसी मीटिंग्स कर रही है।
केरल इन दिनों गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। राज्य में बिजली की मांग में अप्रत्याशित उछाल आया है, जिसके कारण हर दिन 1,000 MW का बड़ा घाटा हो रहा है। 11 सितंबर, 2026 तक राज्य में पीक डिमांड 5,000 MW के पार निकल गई है, जबकि पिछले सालों में यह मांग 3,900 MW से 4,200 MW के बीच रहती थी। इस असंतुलन के चलते Kerala State Electricity Board (KSEB) को ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए शाम के पीक आवर्स में लोड शेडिंग लागू करने पर मजबूर होना पड़ा है।
ग्रिड पर दबाव
यह संकट भीषण गर्मी और कमजोर मॉनसून का नतीजा है। हाइड्रोलॉजिकल (Hydropower) जनरेशन में कमी के कारण राज्य अपनी जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने KSEB के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक इमरजेंसी मीटिंग की है। सरकार ने 15 सितंबर, 2026 तक ग्रिड सप्लाई को सामान्य करने का लक्ष्य रखा है।
आर्थिक और ऑपरेशनल चुनौतियां
लंबी अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) में देरी के कारण KSEB को शॉर्ट-टर्म मार्केट से बिजली खरीदनी पड़ रही है। यह रणनीति बेहद महंगी साबित हो रही है, क्योंकि शॉर्ट-टर्म मार्केट में कीमतें काफी अस्थिर होती हैं। इस तरह की निरंतर निर्भरता राज्य के यूटिलिटी फंड और कैश फ्लो पर भारी दबाव डाल रही है।
राजनीतिक विरोध
इस बिजली संकट ने राजनीतिक हलचल भी पैदा कर दी है। Communist Party of India (Marxist) ने 12 सितंबर, 2026 को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि इस संकट का उपयोग पावर सेक्टर के निजीकरण के लिए किया जा सकता है। अब सभी की निगाहें 15 सितंबर की डेडलाइन और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हैं।
