KP Group ने अपने मेगा एक्सपेंशन प्लान 'KP 3.0' का ऐलान किया है, जिसके तहत कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2032 तक **30 GW** की टोटल क्षमता हासिल करने की तैयारी में है। हालांकि, भारी निवेश और कर्ज के दबाव के बीच यह राह चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है।
30 GW का मेगा लक्ष्य
KP Group ने अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए 'KP 3.0' रोडमैप तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को तीन हिस्सों में बांटा गया है: 10 GW इंडिपेंडेंट पावर एसेट, 10 GW ईपीसी (EPC) प्रोजेक्ट्स और 10 GWh की इंटीग्रेटेड बैटरी मैन्युफैक्चरिंग। फिलहाल कंपनी के पास 9.21 GW का पोर्टफोलियो है।
स्ट्रक्चर में बदलाव
ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बनाने के लिए ग्रुप ने काम का बंटवारा किया है। KPI Green Energy अब सोलर और हाइब्रिड पावर एसेट्स पर फोकस करेगी, वहीं Sun Drops Energia बैटरी स्टोरेज और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स संभालेगी। KP Green Engineering एक्सटर्नल क्लाइंट्स के लिए EPC सर्विसेज पर काम जारी रखेगी। कंपनी अब राजस्थान, महाराष्ट्र के साथ-साथ अफ्रीका और सऊदी अरब जैसे इंटरनेशनल मार्केट्स में भी विस्तार कर रही है।
कर्ज पर नजर और रिस्क फैक्टर
कंपनी ने कर्ज को नियंत्रित रखने के लिए सख्त 'Debt-to-Equity' रेश्यो तय किए हैं:
- KPI Green Energy: अधिकतम 4.0 गुना
- Sun Drops Energia: अधिकतम 3.0 गुना
- इंजीनियरिंग यूनिट्स: अधिकतम 2.0 गुना
हाल ही में KPI Green Energy ने ₹2,410 करोड़ में 507.9 MW के विंड प्रोजेक्ट्स हासिल करने का ऐलान किया है, जो कंपनी की आक्रामक नीति को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी स्केल पर विस्तार से कैश फ्लो पर दबाव पड़ सकता है। कच्चे माल (खासकर सोलर मॉड्यूल्स) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बड़े प्रोजेक्ट्स को 12 महीने के भीतर पूरा करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी।
