यह बड़ा अवार्ड SECI द्वारा पेश की गई कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत 'इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP)' सेगमेंट के लिए मिला है। इस प्रोजेक्ट के सफल पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) एग्जीक्यूशन और 24 महीनों के अंदर कमीशनिंग के बाद, KPEL की मौजूदा IPP क्षमता में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।
यह नया प्रोजेक्ट KPEL के मौजूदा लगभग 50 MW के IPP पोर्टफोलियो को बढ़ाकर 150 MW तक ले जाएगा। यह कंपनी की उस रणनीति के अनुरूप है जहाँ वह अपने इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ-साथ एक मजबूत IPP पोर्टफोलियो विकसित करना चाहती है, जो एक स्थिर और रेकरिंग रेवेन्यू स्ट्रीम प्रदान करता है।
प्रोजेक्ट के लिए ₹3.67 प्रति किलोवॉट-घंटा (kWh) की टैरिफ दर तय की गई है। कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यह डील सीधे SECI के साथ है और इसमें कोई प्रमोटर या ग्रुप कंपनी का हित शामिल नहीं है, इसलिए यह रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन के दायरे में नहीं आता। कंपनी को PPA प्रभावी होने की तारीख से 24 महीनों के भीतर पावर सप्लाई शुरू करनी होगी।
K.P. Energy की पिछले 3 सालों में 74.97% की दमदार प्रॉफिट ग्रोथ रही है। वहीं, कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 42.82% और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) 39.92% रहा है। यह अवार्ड KPEL की यूटिलिटी-स्केल विंड पावर प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता को दर्शाता है, खासकर ऐसे कॉम्पिटिटिव बिडिंग फ्रेमवर्क में।
आगे चलकर, सबसे बड़ा तत्काल जोखिम SECI के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) का सफल और समय पर निष्पादन और प्रोजेक्ट का निर्धारित 24 महीनों में पूरा होना है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कोई भी मार्केट हेडविंड या रेगुलेटरी बदलाव चुनौतियां पेश कर सकता है। निवेशक PPA फाइनल होने और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की प्रगति पर नजर रखेंगे। हालांकि, यह बड़ी IPP क्षमता का विस्तार KPEL के लिए लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू के मामले में एक बड़ा पॉजिटिव कदम है।