Juniper Green Energy की सब्सिडियरी Juniper Nirjara Energy ने SJVN Ltd के साथ **50 MW** के लिए **25 साल** का बिजली आपूर्ति समझौता किया है। **₹4.25 प्रति यूनिट** के टैरिफ पर यह प्रोजेक्ट सोलर और बैटरी स्टोरेज तकनीक से लैस होगा, जिससे बिजली की आपूर्ति स्थिर बनी रहेगी।
भरोसेमंद एनर्जी सप्लाई की दिशा में बड़ा कदम
आमतौर पर सोलर प्रोजेक्ट्स सिर्फ दिन में बिजली देते हैं, लेकिन यह प्रोजेक्ट बिल्कुल अलग है। इसमें 'Firm and Dispatchable Renewable Energy' (FDRE) का इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी को 4 घंटे पीक ऑवर्स में बिजली देनी होगी, जिसके लिए 90 प्रतिशत मंथली अवेलेबिलिटी का सख्त टारगेट रखा गया है। इसे पूरा करने के लिए कंपनी सोलर इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ बड़े पैमाने पर 'Battery Energy Storage Systems' (BESS) का इस्तेमाल करेगी, ताकि ग्रिड को 24 घंटे बिजली मिल सके।
फाइनेंशियल हेल्थ और कर्ज का बोझ
यह डील ऐसे समय में हुई है जब Juniper Green Energy आक्रामक विस्तार और फाइनेंशियल अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। Q1 FY2027 के नतीजों में कंपनी की टोटल इनकम 79 प्रतिशत बढ़कर ₹324 करोड़ रही, जबकि EBITDA 86 प्रतिशत की उछाल के साथ ₹294 करोड़ पर पहुंच गया। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी अपने हालिया IPO से जुटाए गए ₹1,800 करोड़ के फंड का इस्तेमाल कर्ज कम करने में कैसे करती है।
रिस्क और चुनौतियां
25 साल का लंबा PPA रेवेन्यू की गारंटी तो देता है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। 90 प्रतिशत की मंथली अवेलेबिलिटी को बनाए रखना एक बड़ी ऑपरेशनल चुनौती है। अगर ग्रिड के नियमों का पालन करने में देरी हुई या BESS इन्फ्रास्ट्रक्चर समय पर तैयार नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। अब निवेशकों की निगाहें इस प्रोजेक्ट की कमीशनिंग टाइमलाइन और एग्जीक्यूशन पर टिकी हैं।
