'जोन्स एक्ट' का वेवर (Waiver) हुआ फेल! अमेरिकी फ्यूल एक्सपोर्ट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, वजह है ये जंग...

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
'जोन्स एक्ट' का वेवर (Waiver) हुआ फेल! अमेरिकी फ्यूल एक्सपोर्ट ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, वजह है ये जंग...
Overview

अमेरिका में 'जोन्स एक्ट' (Jones Act) के तहत ईंधन (Fuel) की घरेलू शिपमेंट (Shipment) बढ़ाने के लिए लाया गया **60-दिन** का वेवर (Waiver) पूरी तरह फेल साबित हुआ है। जबकि इसका मकसद घरेलू व्यापार को बढ़ावा देना था, इसके बजाय अमेरिका से एशिया और यूरोप के लिए फ्यूल एक्सपोर्ट ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण बनी कीमतों की भारी खाई और आसमान छूते फ्रेट रेट्स (Freight Rates) ने इस पॉलिसी के लक्ष्य को पूरी तरह से पलट दिया।

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वेवर के बावजूद घरेलू फ्यूल ट्रेड में कोई बदलाव नहीं

राष्ट्रपति द्वारा 17 मार्च, 2026 को लागू किया गया 'जोन्स एक्ट' का 60-दिन का अस्थायी वेवर, घरेलू ईंधन शिपमेंट को बढ़ाने में नाकाम रहा। इस पॉलिसी का लक्ष्य बढ़ती फ्यूल कीमतों और पश्चिम एशिया युद्ध से बिगड़ी सप्लाई चेन (Supply Chain) की समस्याओं को दूर करना था। लेकिन, ट्रेड डेटा (Trade Data) ने पॉलिसी के लक्ष्यों के ठीक उलट तस्वीर पेश की है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में अमेरिकी पोर्ट्स (Ports) के बीच क्रूड ऑयल (Crude Oil) और रिफाइंड प्रोडक्ट्स (Refined Products) की शिपमेंट लगभग 1.37 मिलियन बैरल प्रति दिन पर स्थिर रही। गल्फ कोस्ट (Gulf Coast) से घरेलू बाजारों में भेजी गई लिक्विड्स (Liquids) की मात्रा फरवरी के 826,000 बैरल प्रति दिन से घटकर 770,000 बैरल प्रति दिन हो गई। यह दिखाता है कि पॉलिसी मौजूदा मार्केट ट्रेंड्स (Market Trends) पर हावी नहीं हो सकी।

युद्ध ने खोली एक्सपोर्ट की बड़ी तिजोरी

वेवर के काम न करने की मुख्य वजह अमेरिकी फ्यूल एक्सपोर्ट्स की बढ़ती मुनाफेबाजी है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने ग्लोबल एनर्जी (Energy) फ्लो को बाधित किया है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से शिपिंग को, जो दुनिया भर के तेल का लगभग 20% हिस्सा ले जाता है। इसके चलते अमेरिकी रिफाइनर्स (Refiners) के लिए बड़े मुनाफे के मौके बने हैं। नतीजतन, मार्च में अमेरिकी फ्यूल एक्सपोर्ट्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। रिफाइनर्स अपने प्रोडक्शन (Production) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज रहे हैं, जहां कीमतें काफी ज्यादा हैं। यूरोप में गैसोइल फ्यूचर्स (Gasoil Futures) $200 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहे थे, जबकि अमेरिकी अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल (Ultra-Low Sulfur Diesel) फ्यूचर्स $185 से नीचे थे। इस कीमत के अंतर ने शिपर्स (Shippers) और रिफाइनर्स को घरेलू रूट के बजाय विदेशी डेस्टिनेशन्स (Destinations) को चुनने के लिए भारी प्रोत्साहन दिया।

आसमान छूते फ्रेट रेट्स ने ग्लोबल रूट्स को दी तरजीह

ग्लोबल सप्लाई (Supply) में रुकावटों और एक्सपोर्ट प्रॉफिट (Export Profit) में बढ़ोतरी से प्रेरित अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की मांग में आई तेजी ने फ्रेट रेट्स (Freight Rates) को आसमान पर पहुंचा दिया है। जहाज मालिक लगातार लंबे और ज्यादा मुनाफे वाले एशिया और यूरोप के रूट चुन रहे हैं। मार्च के अंत तक, अमेरिकी गल्फ कोस्ट टैंकर मार्केट (Tanker Market) में आई इस सख्ती ने फ्रेट रेट्स को और बढ़ा दिया। यह ट्रेंड 'जोन्स एक्ट' वेवर से मिलने वाले किसी भी संभावित फायदे का सीधा विरोध कर रहा था। गल्फ ऑयल के एनर्जी एडवाइजर टॉम क्लोजा (Tom Kloza) ने बताया कि "विभिन्न कॉन्टिनेंट्स (Continents) से जुड़े ये अविश्वसनीय आर्बिट्रेज अवसर (Arbitrage Opportunities)" जहाजों को घरेलू रूट जैसे गल्फ कोस्ट से नॉर्थईस्ट (Northeast) कॉरिडोर पर ले जाना असंभव बना रहे थे। ऊंचे रेट्स ने वेवर द्वारा लक्षित किसी भी लागत लाभ को खत्म कर दिया।

एनर्जी सेक्टर में रिफाइनर वैल्यूएशन्स (Refiner Valuations)

मैराथन पेट्रोलियम (Marathon Petroleum - MPC) और वैलेरो एनर्जी (Valero Energy - VLO) जैसी प्रमुख अमेरिकी रिफाइनर्स इस जटिल बाजार में काम कर रही हैं। अप्रैल 2026 तक, मैराथन पेट्रोलियम का P/E रेशियो (P/E Ratio) लगभग 18.30 है, और इसकी मार्केट वैल्यू (Market Value) लगभग 71 बिलियन डॉलर के करीब है। वैलेरो एनर्जी का P/E रेशियो थोड़ा ज्यादा, लगभग 32.42 है, और इसकी मार्केट कैप (Market Cap) करीब 73.43 बिलियन डॉलर है। ये आंकड़े व्यापक एनर्जी सेक्टर के लिए सामान्य हैं, जहां अप्रैल 2026 की शुरुआत में S&P 500 एनर्जी सेक्टर का P/E रेशियो लगभग 22.07 के आसपास था। जबकि ये कंपनियां ऊंचे अंतरराष्ट्रीय मार्जिन (Margins) से लाभान्वित हो रही हैं, ये ट्रेंड्स बताते हैं कि 'जोन्स एक्ट' वेवर जैसे पॉलिसी एक्शन का असर तब सीमित होता है जब वे मजबूत ग्लोबल मार्केट फोर्सेज (Market Forces) और जियोपॉलिटिकल अस्थिरता (Geopolitical Instability) का सामना करते हैं। स्टडीज (Studies) यह भी बताती हैं कि 'जोन्स एक्ट' खुद शिपिंग लागतों (Shipping Costs) को बढ़ाता है, और अगर प्रतिबंधों में ढील दी जाए तो सालाना सैकड़ों मिलियन डॉलर की बचत की संभावना है।

ग्लोबल अस्थिरता और पॉलिसी की सीमाएं

वर्तमान स्थिति दिखाती है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं से बाधित हो सकने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा है। पश्चिम एशिया युद्ध ने ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतों को $100 प्रति बैरल से ऊपर धकेल दिया है और बढ़ते वॉर-रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम (War-Risk Insurance Premiums) से पता चलता है कि शिपिंग का माहौल बहुत जोखिम भरा है। घरेलू सप्लाई (Supply) की समस्याओं को कम करने के लिए बनाया गया 'जोन्स एक्ट' वेवर, इसके बजाय यह दिखाता है कि अमेरिकी शिपिंग क्षमता कितनी जल्दी अधिक मुनाफे वाली अंतरराष्ट्रीय मांग के लिए इस्तेमाल हो जाती है। आलोचकों का तर्क है कि ऐसे वेवर, जो तत्काल समस्याओं का समाधान करते हैं, घरेलू समुद्री उद्योग (Maritime Industry) में दीर्घकालिक निवेश को नुकसान पहुंचा सकते हैं, बिना कीमतों में उतार-चढ़ाव के मूल कारणों को ठीक किए। कीमतों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निरंतर निर्भरता का मतलब है कि अमेरिकी उपभोक्ताओं को अस्थायी घरेलू शिपिंग लचीलेपन के बावजूद ग्लोबल सप्लाई की समस्याओं और महंगाई का सामना करना पड़ता रहेगा।

भविष्य पश्चिम एशिया संघर्ष पर निर्भर

अमेरिकी फ्यूल कीमतों और घरेलू शिपिंग का भविष्य इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करता है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष कब तक और कितना तीव्र रहता है। जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है और वे ऊंची रहने की उम्मीद है, मौजूदा मार्केट प्राइस (Market Prices) तत्काल कमी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जोखिम को दर्शाते हैं। 'जोन्स एक्ट' वेवर की छोटी 60-दिन की अवधि में वैश्विक बाजारों पर इस निर्भरता को मौलिक रूप से बदलने की संभावना नहीं है। जब तक अंतरराष्ट्रीय लाभ के अवसर अधिक आकर्षक रहेंगे, अमेरिकी रिफाइनर्स और शिपर्स शायद लाभदायक एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन्स को चुनते रहेंगे, जिससे घरेलू सप्लाई चेन (Supply Chains) वैश्विक घटनाओं की अप्रत्याशित प्रकृति के प्रति खुली रहेगी।

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