प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स Jio-bp और Nayara Energy ने डीजल की बिक्री पर डेली कैप (Daily Cap) लगा दी है। इंडस्ट्रियल ग्राहक बल्क सप्लाई के बजाय सस्ते रिटेल पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं, जिससे इन्वेंटरी पर दबाव बढ़ गया है।
रिटेल पंपों पर क्यों उमड़ी भीड़?
बाजार में रिटेल डीजल और बल्क डीजल की कीमतों में बड़ा अंतर आ गया है। बल्क डीजल की कीमतें ग्लोबल मार्केट की उठापटक के साथ बदलती रहती हैं, जबकि रिटेल डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस अंतर का फायदा उठाने के लिए फैक्ट्री मालिकों, टेलीकॉम टावर ऑपरेटर्स और बड़ी फ्लीट मालिकों ने थोक के बजाय रिटेल पंपों से खरीदारी शुरू कर दी है।
कंपनियों का कदम
इन्वेंटरी खत्म होने के खतरे और आम वाहन चालकों की सुविधा को देखते हुए, Jio-bp ने प्रति ग्राहक डेली वॉल्यूम कैप तय कर दी है। वहीं, Nayara Energy ने आउटफ्लो को नियंत्रित करने के लिए टियर-आधारित (Tiered) प्रतिबंध लागू किए हैं।
सरकारी कंपनियों पर नजर
यह संकट केवल प्राइवेट प्लेयर्स तक सीमित नहीं है। अब भारतीय बाजार के बड़े हिस्से को नियंत्रित करने वाली सरकारी कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation भी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। अगर बल्क खरीदारों का यही रवैया रहा, तो सरकारी पंपों पर भी राशनिंग या इसी तरह के कड़े नियम लागू हो सकते हैं।
इन्वेस्टर्स के लिए यह स्थिति क्रूड ऑयल की वैश्विक कीमतों और घरेलू फ्यूल प्राइसिंग के बीच के तनाव को दर्शाती है। यदि सरकार की ओर से थोक सप्लाई को सामान्य करने के लिए कोई रेगुलेटरी इंटरवेंशन नहीं आया, तो देश भर में फ्यूल की शॉर्टेज का रिस्क बढ़ सकता है।
