Jio-bp ने पेट्रोल की कीमतों में **₹5** प्रति लीटर और डीजल में **₹3** प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। इस साल यह कंपनी का पहला बड़ा बदलाव है। वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं के कारण कंपनी ने यह कदम उठाया है।
बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
यह प्राइस हाइक 11 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो गई है। Reliance Industries की जॉइंट वेंचर कंपनी Jio-bp ने यह फैसला ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिटेल मार्जिन पर दबाव के चलते लिया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% पेट्रोलियम इंपोर्ट करता है, ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम रास्तों पर तनाव सीधे तौर पर कच्चे तेल की लागत को महंगा बना रहा है।
सेल रिस्ट्रिक्शंस और नई रणनीति
इससे पहले Jio-bp ने डीजल की बिक्री पर प्रति ट्रांजैक्शन 50 लीटर की लिमिट तय की थी, ताकि बल्क बायर्स के कारण रिटेल स्टॉक खत्म न हो। कंपनी को उम्मीद है कि इस नई बढ़ोतरी के बाद वह ग्लोबल मार्केट के हिसाब से रिटेल कीमतों को बैलेंस कर पाएगी, जिससे भविष्य में क्वांटिटी कैपिंग की जरूरत कम हो सकती है।
सरकारी कंपनियों से बढ़ी चुनौती
दिलचस्प बात यह है कि Nayara Energy ने भी अक्टूबर की शुरुआत में कीमतों में बदलाव किया था, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों—Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum—ने अब तक कीमतों में वैसी बढ़ोतरी नहीं की है। चूंकि ये सरकारी कंपनियां मार्केट का 90% हिस्सा नियंत्रित करती हैं, इसलिए प्राइवेट खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रॉफिटेबिलिटी और मार्केट शेयर के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
इकोनॉमी के लिए खतरे की घंटी
निवेशकों के लिए यह सिर्फ फ्यूल की कीमतों का मामला नहीं है, बल्कि यह महंगाई (Inflation) के संकेत भी हैं। Reserve Bank of India ने रेपो रेट को पहले ही 5.50% कर दिया है। यदि तेल के दाम और बढ़ते हैं, तो इसका असर लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और कंज्यूमर सेंटीमेंट पर साफ दिखेगा। अब बाजार की नजर इस पर है कि क्या सरकारी कंपनियां भी दाम बढ़ाती हैं, या फिर प्राइवेट रिटेलर्स को मार्केट शेयर खोने का जोखिम उठाना पड़ेगा।
