ED की जांच के घेरे में Jaypee Power Ventures के चेयरमैन
Jaypee Power Ventures Limited (JPVL) के शीर्ष नेतृत्व के लिए कानूनी परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चेयरमैन, श्री मनोज गौर, ने 19 फरवरी 2026 को अपनी अंतरिम जमानत (interim bail) खत्म होने के बाद कानूनी अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। यह कदम जयपी ग्रुप की मुख्य कंपनियों, Jaypee Infratech Ltd. (JIL) और Jaiprakash Associates Ltd. (JAL), में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चल रही जांच से जुड़ा हुआ है।
पहले भी आरोपों से घिरा रहा है जयपी ग्रुप
एक समय रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में बड़ा नाम रहे जयपी ग्रुप पर पिछले कई सालों से भारी कर्ज और फंड डायवर्जन (fund diversion) के आरोप लगे हैं। ग्रुप की प्रमुख कंपनियों JAL और JIL को दिवालियापन की कार्यवाही (corporate insolvency proceedings) का सामना करना पड़ा है। ED की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर रहा है कि कैसे रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स के लिए खरीदारों से जुटाए गए पैसों को कथित तौर पर दूसरी कंपनियों में भेजा गया, जिससे कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए और खरीदार ठगा महसूस कर रहे हैं।
श्री मनोज गौर, जो ग्रुप के नेतृत्व का अहम हिस्सा रहे हैं, इन जांचों के केंद्र में हैं। उन्हें ED ने पिछले साल नवंबर 2025 में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार भी किया था। यह ताजा आत्मसमर्पण उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
गवर्नेंस पर उठे सवाल, SEBI ने भी लगाया था जुर्माना
यह कोई पहला मामला नहीं है जब JPVL या उसके चेयरमैन पर इस तरह के आरोप लगे हों। दिसंबर 2024 में, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने Jayprakash Power Ventures और इसके कुछ टॉप अधिकारियों, जिनमें मनोज गौर भी शामिल थे, पर ₹54 लाख का जुर्माना लगाया था। SEBI की जांच में कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स (financial statements) को गलत तरीके से पेश करने, कॉर्पोरेट गारंटी, संबंधित पक्ष के लेनदेन (related-party transactions) और निवेशों के मूल्यांकन (valuation of investments) में खामियां पाई गई थीं। इससे कंपनी के वित्तीय खुलासे (financial disclosure) के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसके अलावा, कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों (BSE और NSE) से भी लिस्टिंग नियमों के उल्लंघन के लिए छोटे जुर्माने भरने पड़े हैं।
JPVL का कहना है कि ये आरोप कंपनी के ऑपरेशन से जुड़े नहीं हैं और इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, चेयरमैन की लगातार कानूनी उलझनें निवेशकों के विश्वास और कंपनी की गवर्नेंस की प्रतिष्ठा पर निश्चित रूप से सवालिया निशान लगाती हैं।