जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने **9.5 MW** के Sewa-I हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट को प्राइवेट इन्वेस्टमेंट मॉडल पर शिफ्ट करने का फैसला किया है। PMDP-2015 योजना के तहत फंड की कमी से यह प्रोजेक्ट लंबे समय से अटका हुआ था।
सरकारी फंड की विफलता के बाद नई राह
वर्ष 2015 में प्राइम मिनिस्टर डेवलपमेंट पैकेज (PMDP) के तहत इस प्रोजेक्ट को शामिल किया गया था, लेकिन मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी से अपेक्षित फंड न मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट केवल कागजों तक ही सीमित रह गया। अब प्रशासन ने फैसला किया है कि वह खुद डेवलपर या फाइनेंसर बनने के बजाय केवल एक सुविधा प्रदाता (Facilitator) की भूमिका निभाएगा।
प्राइवेट प्लेयर्स के लिए नई चुनौती
स्थानीय पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के पास फिलहाल 13 छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट्स हैं जो इसी तरह की समस्याओं में फंसे हुए हैं। नई रणनीति के तहत, अब प्राइवेट कंपनियों या इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स को ही कंस्ट्रक्शन से लेकर मेंटेनेंस तक का पूरा कैपिटल एक्सपेंडिचर और ऑपरेशनल रिस्क उठाना होगा।
Hydropower Policy 2026 पर टिकीं निगाहें
इस पूरे प्लान की सफलता सरकार की नई 'Hydropower Policy 2026' पर निर्भर है, जो फिलहाल विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समीक्षा के दौर में है। इन्वेस्टर्स और डेवलपर्स फिलहाल पॉलिसी के फाइनल होने का इंतजार कर रहे हैं।
प्रोजेक्ट की व्यावहारिकता इस बात पर निर्भर करेगी कि टैरिफ स्ट्रक्चर कितना स्पष्ट है और पावर परचेज एग्रीमेंट्स की शर्तें क्या होंगी। साथ ही, बिजली को बाहर ले जाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता भी एक बड़ा सवाल है। अभी के लिए, यह प्रोजेक्ट अनिश्चितता की स्थिति में है और कंस्ट्रक्शन की कोई भी डेडलाइन अभी तय नहीं की गई है।
