जम्मू-कश्मीर में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए **1 सितंबर** से बिजली महंगी हो जाएगी। रेगुलेटर ने रेवेन्यू गैप को कम करने के लिए इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स के लिए बिजली के रेट में **9.76%** तक की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
बिजली के नए रेट और चुनौती
1 सितंबर, 2026 से जम्मू-कश्मीर में मैन्युफैक्चरिंग कारोबारियों के लिए कामकाज महंगा होने वाला है। जॉइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (JERC) ने बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। यह बढ़ोतरी पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन्स की उम्मीद से कहीं ज्यादा है।
नई गाइडलाइन्स के तहत, लो-टेंशन (LT) इंडस्ट्रियल यूजर्स के लिए रेट में 9.52% और हाई-टेंशन (HT) इंडस्ट्रियल यूजर्स (11 kV) के लिए 9.76% की बढ़ोतरी की गई है। कुल मिलाकर, यूनियन टेरिटरी में सभी तरह के कंज्यूमर्स के लिए औसतन 6.83% की बढ़ोतरी तय की गई है। दिलचस्प बात यह है कि जम्मू पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (JPDCL) और कश्मीर पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (KPDCL) ने पहले केवल 5% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, जिसे रेगुलेटर ने ठुकराकर उससे कहीं ज्यादा का झटका दिया है।
क्यों बढ़े दाम?
रेगुलेटर ने यह फैसला पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के करीब ₹2,922.85 करोड़ के सालाना रेवेन्यू गैप को भरने के लिए लिया है। इसका मकसद सरकारी बिजली कंपनियों की माली हालत को सुधारना है।
इंडस्ट्री की चिंता
इस कदम का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। फेडरेशन ऑफ चैम्बर्स ऑफ इंडस्ट्रीज कश्मीर (FCIK) का कहना है कि पहले से ही लॉजिस्टिक्स और रॉ मटेरियल की मार झेल रहे कारोबारियों के लिए बिजली बिल में इतना बड़ा इजाफा 'दोहरी मार' जैसा है। इंडस्ट्री लीडर्स को डर है कि इससे स्थानीय सामान की लागत बढ़ेगी और वे दूसरे राज्यों के मुकाबले कॉम्पिटिशन में पीछे रह जाएंगे। साथ ही, इससे नए इन्वेस्टमेंट और कैपेसिटी एक्सपेंशन पर भी ब्रेक लग सकता है।
जरूरी सूचना: यह फैसला केवल एक रेगुलेटरी बदलाव है। जम्मू एंड कश्मीर इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक स्टेट-ओन्ड अनलिस्टेड कंपनी है, जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) या बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड नहीं है।
