JSW Projects और COEP Technological University ने पुणे में **₹800 करोड़** के निवेश से एक एडवांस बैटरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और सेल वैलिडेशन सेंटर शुरू करने का ऐलान किया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में लिथियम-आयन और सोडियम-आयन बैटरी सेल का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना है।
स्वदेशी तकनीक पर जोर
पुणे के चिखली रिसर्च पार्क में स्थापित होने वाला यह सेंटर बैटरी डिजाइनिंग, टेस्टिंग और वैलिडेशन के लिए एक बड़ा हब बनेगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य लिथियम-आयन और सोडियम-आयन बैटरी सेल्स को भारत में ही विकसित करना है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। इस पहल से न केवल देश की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी बल्कि क्लीन एनर्जी सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा।
दो चरणों में होगा काम
यह प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा किया जाएगा:
- पहला चरण: सेल का डिजाइन, सिमुलेशन और प्रोटोटाइप तैयार करना।
- दूसरा चरण: इसे एक डेडिकेटेड 'सेल वैलिडेशन सेंटर' में बदलना, जहाँ 100 Ah से लेकर 600 Ah तक के बैटरी सेल्स तैयार किए जा सकेंगे। इन्हें भारत की चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल बनाया जाएगा।
JSW की भविष्य की रणनीति
JSW ग्रुप के चेयरमैन सज्जन जिंदल का मानना है कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बैटरी सेल्स उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना आज के समय में कच्चा तेल (Oil) है। इस साझेदारी के जरिए कंपनी EV और एनर्जी स्टोरेज स्पेस में एक मजबूत स्थानीय सप्लाई चेन बनाने की तैयारी कर रही है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
हालाँकि यह एक बड़ा कदम है, लेकिन निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग एक बहुत ही कैपिटल-इंटेंसिव बिजनेस है। इसे कमर्शियल स्केल पर लाना और ग्लोबल दिग्गजों के साथ प्रतिस्पर्धा करना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, लिथियम और कोबाल्ट जैसे कच्चे माल की स्थिर सप्लाई बनाए रखना भी भविष्य में एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित होगा। इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में 1,000 से ज्यादा नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
