इराक की सरकारी तेल कंपनी SOMO ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के तनाव से बचने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब ओमान तट से तेल की सप्लाई की तैयारी है, ताकि भारी डिस्काउंट देने की मजबूरी खत्म हो सके और भारत जैसे आयातकों के लिए सप्लाई स्थिर रहे।
इराक की सरकारी ऑयल मार्केटर, SOMO ने 'Basrah Medium' और 'Basrah Heavy' क्रूड के लिए अपनी एक्सपोर्ट रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सितंबर 2026 से इराक ओमान तट पर शिप-टू-शिप (STS) ट्रांसफर की सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिससे इंटरनेशनल खरीदारों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य के जोखिम भरे रास्तों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले कुछ महीनों में, सुरक्षा और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण इराक को खरीदारों को $25 से लेकर $30 प्रति बैरल तक का डिस्काउंट देना पड़ रहा था। इससे सरकारी खजाने पर बड़ा दबाव बना हुआ था। इस नए सुरक्षित रूट के जरिए बगदाद अपनी एक्सपोर्ट रेवेन्यू को स्थिर करना चाहता है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स यह भी देख रहे हैं कि क्या STS ट्रांसफर की प्रक्रिया टर्मिनल लोडिंग जितनी ही कुशल और किफायती होगी।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
भारत के एनर्जी सेक्टर के लिए इराक कच्चे तेल का एक प्रमुख सप्लायर है। सप्लाई चेन में कोई भी रुकावट सीधे तौर पर देश में महंगाई और इंपोर्ट बिल को प्रभावित करती है। हालांकि यह नया रास्ता सप्लाई को सुरक्षित करने की कोशिश है, लेकिन लॉजिस्टिक जटिलताओं और इंश्योरेंस लागत बढ़ने से तेल की अंतिम कीमत पर असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आंकड़ों पर एक नजर
जुलाई में इराक का एक्सपोर्ट वॉल्यूम करीब 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया था, लेकिन यह अभी भी संघर्ष से पहले की 3.3 मिलियन बैरल प्रति दिन की क्षमता से काफी कम है। फिलहाल, 1 सितंबर 2026 से शुरू होने वाली यह नई व्यवस्था 3 महीने के लिए मंजूर की गई है, जिस पर ग्लोबल मार्केट्स की पैनी नजर बनी रहेगी।
