Crude Oil Import: रूस से मोहभंग! इराक से भारत का तेल आयात **106%** बढ़ा

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AuthorNeha Patil|Published at:
Crude Oil Import: रूस से मोहभंग! इराक से भारत का तेल आयात **106%** बढ़ा

भारत ने सितंबर में इराक से **4.41 मिलियन टन** कच्चा तेल आयात किया है, जो पिछले महीने के मुकाबले **106%** की भारी वृद्धि है। वहीं, रूसी तेल की कीमतों में छूट कम होने और अमेरिकी टैरिफ के डर के बीच रूस से आयात में **32%** की गिरावट दर्ज की गई है।

भारतीय एनर्जी सेक्टर में कच्चे तेल की सोर्सिंग को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इंडियन ऑयल (IOC), रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत पेट्रोलियम (BPCL) और HPCL-Mittal Energy (HMEL) जैसी प्रमुख कंपनियों ने रूसी तेल से दूरी बनाते हुए अपना रुख इराक की ओर मोड़ लिया है।

क्यों कम हुआ रूसी तेल का आकर्षण?

लंबे समय से भारतीय रिफाइनर्स रूसी 'यूराल्स' (Urals) क्रूड पर मिलने वाली भारी छूट का फायदा उठा रहे थे। हालांकि, अब रूसी तेल की कीमतें बढ़ने और डिस्काउंट घटने से यह सौदा पहले जैसा फायदेमंद नहीं रहा। साथ ही, रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का खतरा भी कंपनियों को मिडिल ईस्ट की ओर वापस धकेल रहा है।

लॉजिस्टिक्स में बदलाव और बढ़ता जोखिम

यह बदलाव सिर्फ सप्लायर बदलने तक सीमित नहीं है। अब कई रिफाइनर्स ने Free-on-Board (FOB) शर्तों पर इराक से तेल खरीदना शुरू किया है। इसका मतलब है कि शिपमेंट लोड होने के बाद माल की पूरी जिम्मेदारी खरीदार की है।

  1. सीधा नियंत्रण: अब भारतीय कंपनियों को खुद टैंकर चार्टर करने पड़ रहे हैं, जिससे ऑपरेशनल जटिलताएं बढ़ गई हैं।
  2. बढ़ते खर्च: फारस की खाड़ी में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा और इंश्योरेंस प्रीमियम का खर्च अब रिफाइनर्स की जेब पर सीधा असर डाल रहा है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

निवेशकों को अब ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन्स (GRM) पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। फ्रेट रेट्स और इंश्योरेंस में जारी तेजी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकती है। आने वाले समय में शिपिंग मैनेजमेंट और मिडिल ईस्ट की जियो-पॉलिटिकल स्थिति भारतीय रिफाइनरी स्टॉक्स की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.