होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से ईरान द्वारा ट्रांजिट की पाबंदियां कम करने के बाद इराक का क्रूड ऑयल निर्यात अगस्त में बढ़कर **2.34 मिलियन** बैरल प्रतिदिन (BPD) पर पहुंच गया है, जिससे Reliance और BPCL जैसी भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिली है।
निर्यात में जोरदार उछाल
इराक ने अपने कच्चे तेल के शिपमेंट में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है, जिससे उन एशियाई रिफाइनरियों को राहत मिली है जो मध्य-पूर्व के क्रूड पर निर्भर हैं। अगस्त 2026 में इराक का निर्यात 2.34 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) तक पहुंच गया है, जो जुलाई के 1.35 मिलियन BPD के मुकाबले काफी बड़ा सुधार है। यह तेहरान के उस फैसले के बाद मुमकिन हुआ है, जिसमें उसने चुनिंदा इराकी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।
डिस्काउंट का खेल
इस रिकवरी के पीछे का असली कारण आक्रामक प्राइसिंग है। इराक का स्टेट ऑयल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (State Oil Marketing Organization) $25 से $30 प्रति बैरल तक का भारी डिस्काउंट दे रहा है। यह कटौती खरीदारों को आकर्षित करने के लिए है ताकि वे शिपिंग और इंश्योरेंस के उच्च प्रीमियम—जो लगभग $17 प्रति बैरल है—की भरपाई कर सकें।
भारतीय कंपनियों पर असर
भारतीय ऊर्जा कंपनियों के लिए यह सप्लाई चेन को संभालने की दिशा में एक बड़ा कदम है। Reliance Industries ने अगस्त में 4 मिलियन बैरल 'बसरा क्रूड' का आयात किया है। वहीं, Bharat Petroleum Corporation (BPCL) फुजैराह के पास शिप-टू-शिप ट्रांसफर के जरिए इस फाइनेंशियल ईयर की अपनी पहली इराकी शिपमेंट हासिल कर रही है।
अभी भी बना हुआ है जोखिम
ऑपरेशनल सुधार के बावजूद सप्लाई चेन अभी भी नाजुक स्थिति में है। मौजूदा निर्यात स्तर फरवरी 2026 में संघर्ष शुरू होने से पहले के 3.3 से 3.7 मिलियन बैरल BPD के स्तर से काफी नीचे है। चूँकि इराक अभी भी टैंकर ट्रांजिट के लिए तेहरान की अनुमति पर निर्भर है, इसलिए सप्लाई की स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों को आने वाले दिनों में होर्मुज क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिति और सप्लाई की निरंतरता पर कड़ी नजर रखनी होगी।
