कूटनीतिक बातचीत लाई रंग
ईरान ने गुरुवार को भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध रूप से गुजरने की इजाजत दे दी है। यह सफलता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराग्ची के बीच मंगलवार रात हुई अहम कूटनीतिक बातचीत का सीधा परिणाम है। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय तनाव की स्थिति पर चर्चा की और भारतीय समुद्री संपत्तियों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया।
होर्मुज: दुनिया का अहम 'चोकपॉइंट'
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस संकरे जलमार्ग से गुजरता है। यह दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग पांचवां हिस्सा और समुद्री तेल व्यापार का लगभग चौथाई हिस्सा है। बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी इसी गलियारे से होकर गुजरती है।
ईरान की सख्त शर्ते
जहां भारतीय जहाजों को मंजूरी मिल गई है, वहीं ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के नौसैनिक बलों के कमांडर रियर एडमिरल अलीरजा तंसारी ने कहा कि बुधवार को दो जहाजों ने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा, "पास होने के इरादे वाले किसी भी जहाज को ईरान से अनुमति लेनी होगी।" यह बयान संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच सख्त नियंत्रण का संकेत देता है।
भारत की निगरानी और नाविकों की सुरक्षा
भारत के शिपिंग मंत्रालय और शिपिंग महानिदेशालय ने स्थिति की निगरानी और भारतीय समुद्री यातायात की सहायता के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम स्थापित किया है। फिलहाल, फारस की खाड़ी में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज सक्रिय हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। अधिकारी क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिपिंग फर्मों, भर्ती एजेंसियों और विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ लगातार संपर्क में हैं।
