Indus Towers ने अपने टेलीकॉम नेटवर्क को ग्रीन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अब तक **50,000** साइट्स पर सोलर पावर इंस्टॉल कर ली है और FY29 तक इसे **1 लाख** करने का लक्ष्य रखा है।
ग्रीन एनर्जी से कॉस्ट कटिंग की तैयारी
Indus Towers ने अपने टेलीकॉम टावर नेटवर्क में सोलर पावर का जाल बिछाना शुरू कर दिया है। कंपनी ने अब तक 50,000 साइट्स पर सोलर पैनल लगाए हैं, जिनसे 300 MW की रिन्यूएबल कैपेसिटी पैदा हो रही है। इस बदलाव का सीधा असर डीजल पर निर्भरता कम करने पर है, जो टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अब तक एक महंगा विकल्प रहा है।
ऑपरेशनल बदलाव और बचत
कंपनी ने सोलर पैनल के साथ हाई-कैपेसिटी लिथियम-आयन बैटरी और स्मार्ट एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया है। इससे प्रति किलोवाट एनर्जी कॉस्ट में 8% से 10% की कमी आई है। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि FY27 की पहली छमाही में कंपनी का डीजल कंजम्पशन 11% तक घट गया है।
फाइनेंशियल सेहत पर नजर
नतीजों की बात करें तो, कंपनी का रेवेन्यू ₹8,516 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 4.0% की बढ़ोतरी दिखी। हालांकि, नेट प्रॉफिट 2.5% गिरकर ₹1,793 करोड़ पर आ गया है और EBITDA मार्जिन 54.4% रहा। यह साफ है कि लागत कम करने के प्रयासों के बावजूद कंपनी को बॉटम लाइन पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
भविष्य की योजना और जोखिम
कंपनी राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अपनी सोलर क्षमता को तेजी से बढ़ा रही है। हालांकि, निवेशकों को सावधान रहने की भी जरूरत है। मानसून जैसे मौसम के कारण सोलर एनर्जी की एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है, जिससे कंपनी को दोबारा महंगे डीजल का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा, टेलीकॉम सेक्टर में कॉम्पिटिशन और बड़े ग्राहकों पर निर्भरता कंपनी के मुनाफे के लिए एक रिस्क फैक्टर बनी हुई है।
