Indraprastha Gas (IGL) के निवेशकों के लिए चिंता की खबर है। कंपनी का Q1 FY27 का मुनाफा 48% घटकर **₹186 करोड़** रह गया है। बढ़ती ग्लोबल गैस लागत और दिल्ली में नई EV पॉलिसी के कारण भविष्य में CNG थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन पर रोक, कंपनी के मार्जिन और वॉल्यूम ग्रोथ पर दबाव बना रहे हैं।
मार्जिन पर पड़ी लागत की मार
Indraprastha Gas (IGL) मुश्किल दौर से गुज़र रही है। कंपनी के फाइनेंशियल नतीजों और रेगुलेटरी बदलावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के दिनों में स्टॉक पर दबाव देखा जा रहा है, जो कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और CNG सेगमेंट में लंबी अवधि की वॉल्यूम ग्रोथ को लेकर चिंताओं को दर्शाता है।
फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में, IGL ने ₹186.18 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 48% की गिरावट है। हालांकि, रेवेन्यू में 16% की सालाना बढ़त दर्ज कर ₹5,040.15 करोड़ तक पहुंचा, लेकिन यह टॉप-लाइन ग्रोथ ऑपरेटिंग खर्चों में हुई तेज बढ़ोतरी की भरपाई नहीं कर सकी। इस तिमाही में EBITDA मार्जिन घटकर 6% रह गया, जो पिछले साल 13% था।
मुनाफे में इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल LNG की बढ़ी हुई कीमतें हैं, जो पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अस्थिर बनी हुई हैं। इसके अलावा, कंपनी को गैस सोर्सिंग मिक्स में भी प्रतिकूलता का सामना करना पड़ा है। एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म (APM) के तहत सस्ती गैस का आवंटन कम होने से कंपनी को महंगी इम्पोर्टेड गैस पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आता है, खासकर अगर बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह से ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता।
दिल्ली की EV पॉलिसी का असर
तत्काल लागतों से परे, कंपनी को दिल्ली EV पॉलिसी 2026-30 से एक स्ट्रक्चरल चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस पॉलिसी के तहत, 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में सभी नए थ्री-व्हीलर रजिस्ट्रेशन इलेक्ट्रिक होने अनिवार्य होंगे। चूंकि थ्री-व्हीलर CNG का एक महत्वपूर्ण उपभोक्ता है, इसलिए इस रेगुलेटरी बदलाव से नेशनल कैपिटल रीजन में कंपनी की भविष्य की वॉल्यूम ग्रोथ के लिए एक हेडविंड (बाधा) पैदा होती है।
बाजार विश्लेषक इन विकासों पर सक्रिय रूप से नज़र रख रहे हैं। हालांकि कुछ ब्रोकरेज फर्मों ने लंबी अवधि के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखा है, लेकिन उन्होंने उच्च इनपुट लागतों और संभावित वॉल्यूम ठहराव से उत्पन्न जोखिमों को दर्शाने के लिए अपने प्राइस टारगेट को नीचे संशोधित किया है। निवेशकों के लिए मुख्य चिंता यह बनी हुई है कि क्या कंपनी अपने मार्जिन को सुरक्षित रख पाएगी यदि गैस की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, और क्या वह अपने प्राथमिक बाजार में क्लीनर एनर्जी विकल्पों में बदलाव को प्रभावी ढंग से नेविगेट कर पाएगी।
आगे देखते हुए, निवेशक कंपनी की गैस सोर्सिंग मिक्स को प्रबंधित करने की क्षमता और आगामी EV नियमों का बिक्री की मात्रा पर पड़ने वाले प्रभाव पर नज़र रखेंगे। IGL अपने नियोजित पूंजीगत व्यय को नकदी प्रवाह सृजन के साथ कितनी अच्छी तरह संतुलित कर सकती है, यह भी इस संक्रमण काल के दौरान उसके वित्तीय स्वास्थ्य का एक प्रमुख कारक होगा।
