Russian Crude Oil: रूस से आयात में **29%** की भारी गिरावट, अब वेनेजुएला की ओर मुड़ रहे रिफाइनर्स

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Russian Crude Oil: रूस से आयात में **29%** की भारी गिरावट, अब वेनेजुएला की ओर मुड़ रहे रिफाइनर्स

रूस से भारत का कच्चा तेल आयात सितंबर में घटकर **1.82 मिलियन बैरल** प्रतिदिन पर आ गया है, जो जुलाई के **2.57 मिलियन** के रिकॉर्ड स्तर से काफी कम है। बढ़ती कीमतों और चीन से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, Reliance Industries अब वेनेजुएला के कच्चे तेल पर अपना दांव बढ़ा रही है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों का गणित तेजी से बदल रहा है। सितंबर 2026 में रूसी क्रूड ऑयल का आयात 29% गिरकर 1.82 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया है। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण रूसी 'Urals' क्रूड पर मिलने वाले डिस्काउंट का कम होना है। अब यह क्रूड मार्केट रेट के करीब ट्रेड कर रहा है, जिससे भारतीय रिफाइनर्स के लिए इसका आकर्षण घट गया है। इसके अलावा, चीन की ओर से रूसी तेल की मांग बढ़ने से बाजार में सप्लाई का दबाव बढ़ गया है।

वेनेजुएला की ओर बड़ा कदम

रूस पर निर्भरता कम करने के लिए Reliance Industries ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। कंपनी वेनेजुएला से मिलने वाले हैवी क्रूड का आयात बढ़ा रही है, जिसके अक्टूबर 2026 तक 465,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने का अनुमान है।

हालांकि, यह बदलाव हर किसी के लिए आसान नहीं है। वेनेजुएला का तेल 'हाई-सल्फर' और एसिडिक होता है, जिसे रिफाइन करने के लिए अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। Reliance का जामनगर कॉम्प्लेक्स इसके लिए पूरी तरह सक्षम है, जबकि सरकारी रिफाइनर्स के पुराने प्लांट इस तकनीकी चुनौती का सामना करने में पिछड़ रहे हैं।

निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत

इस रणनीतिक बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। नए और गैर-पारंपरिक सप्लायर्स से तेल मंगाने की लॉजिस्टिकल लागत अधिक है। साथ ही, अमेरिकी कानूनों का खतरा और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन और क्रूड मिक्स पर कड़ी नजर रखनी होगी, क्योंकि यही कंपनी के मुनाफे की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.