रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में निवेश का जलवा
भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी उत्पादन में जबरदस्त इजाफा किया है। फाइनेंशियल ईयर 25 (FY25) में बिजली उत्पादन में इसका हिस्सा 14.2% (FY16) से बढ़कर 20.2% हो गया है। इस ग्रोथ को सेक्टर में हुए भारी निवेश का सहारा मिला है, जिसमें क्रेडिट ग्रोथ छह गुना बढ़कर ₹10,325 करोड़ (FY25) तक पहुंच गई, जो 2021 में ₹1,688 करोड़ थी। अब भारत रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में दुनिया में चौथे स्थान पर है।
बढ़ती मांग से घरेलू सप्लाई पर दबाव
वहीं, प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत में भी 18.3% का इजाफा हुआ है, जो FY25 में 18,096 मेगाजूल प्रति व्यक्ति दर्ज की गई। तेजी से बढ़ रहे औद्योगिकीकरण और बढ़ती आय की वजह से इस ऊर्जा मांग में वृद्धि घरेलू उत्पादन की क्षमता से अधिक हो गई है, जिसके चलते आयात पर निर्भरता बढ़ी है। अनुमान है कि 2030 तक भारत की बिजली मांग प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज दर, यानी 6.4% सालाना की दर से बढ़ेगी।
ग्रीन एनर्जी के बावजूद बढ़ी आयात निर्भरता
रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के बावजूद, देश की कुल ऊर्जा आयात निर्भरता FY16 के 37.8% से बढ़कर FY25 में 40.6% हो गई है। खासकर क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) पर आयात निर्भरता 84.6% से बढ़कर 89.4% हो गई है, और नेचुरल गैस का आयात 39.9% से उछलकर 49.7% पर पहुंच गया है। हालांकि, कोयले पर आयात निर्भरता 27.3% से घटकर 23.5% हुई है, लेकिन कोयला अभी भी ऊर्जा का मुख्य स्रोत बना हुआ है।
आर्थिक और सुरक्षा के जोखिम
आयातित ईंधन पर यह लगातार निर्भरता भारत को वैश्विक कीमतों की अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों के सामने ला खड़ा करती है। Crisil Ratings के विश्लेषकों का कहना है कि करीब 85% कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के कारण भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है। कच्चे तेल की कीमत में $10 का इजाफा भारत के सालाना आयात बिल में $15-20 अरब जोड़ सकता है, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई पर असर पड़ेगा। प्रमुख शिपिंग मार्गों में किसी भी तरह की रुकावट कीमतों में तेज उछाल ला सकती है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
भारत की ऊर्जा नीति का लक्ष्य रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है। 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का सरकारी लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा पर लगातार फोकस को दर्शाता है। हालांकि, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। रिन्यूएबल एनर्जी को तेजी से अपनाने और विश्वसनीय ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रिड आधुनिकीकरण और स्टोरेज में निवेश की जरूरत है। लगातार बनी रहने वाली भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण आयात स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू स्वच्छ ऊर्जा को और तेज करने की उम्मीद है। विश्लेषक उम्मीद करते हैं कि रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी, लेकिन बढ़ती मांग के बीच आयात निर्भरता एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी।