सितंबर 2026 में भारत का पावर ग्रिड रिन्यूएबल एनर्जी को संभालने में नाकाम रहा, जिसके चलते **378.52 मिलियन यूनिट (MU)** बिजली बेकार चली गई। गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में हुई इस भारी कटौती ने पावर डेवलपर्स के लिए रेवेन्यू का बड़ा रिस्क खड़ा कर दिया है।
भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तेज रफ्तार अब बुनियादी ढांचे की रुकावटों से टकरा रही है। सितंबर 2026 में रिन्यूएबल पावर उत्पादकों की 378.52 MU बिजली इसलिए बर्बाद हो गई क्योंकि ग्रिड इस सप्लाई को लेने में अक्षम था। यह कुल उत्पादन का लगभग 1.28% हिस्सा है। पावर कंपनियों के निवेशकों के लिए यह सिर्फ तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स (IPPs) के मुनाफे को कम कर रही है।
रेवेन्यू पर क्यों पड़ रहा असर?
जब ग्रिड ऑपरेटर सौर और पवन ऊर्जा संयंत्रों को उत्पादन कम करने या बंद करने का निर्देश देते हैं, तो इसे 'कर्टेलमेंट' (Curtailment) कहा जाता है। चूंकि बिजली ग्रिड में नहीं जा पाती, इसलिए कंपनियां उसे बेच नहीं पातीं और उन्हें सीधा नुकसान होता है। सितंबर में हुई कुल बर्बादी का करीब 61% हिस्सा इमरजेंसी ग्रिड बैलेंसिंग ऑर्डर के कारण था। यह दिखाता है कि 44.6 GW की अतिरिक्त सोलर क्षमता जुड़ने के बाद ग्रिड इसे संभालने में संघर्ष कर रहा है।
गुजरात और राजस्थान में ज्यादा खतरा
यह संकट उन राज्यों में अधिक है जहां रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स का घनत्व ज्यादा है। सितंबर में हुई कुल बिजली बर्बादी का 79% हिस्सा अकेले गुजरात और राजस्थान से आया है। गुजरात में पवन ऊर्जा संपत्तियां और राजस्थान में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स इस समस्या से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। जो निवेशक इन राज्यों में अधिक एक्सपोजर वाली कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं, उन्हें ग्रिड अस्थिरता के चलते रिस्क का सामना करना पड़ सकता है।
स्टोरेज (BESS) ही एकमात्र समाधान
इस समस्या से निपटने के लिए अब इंडस्ट्री 'बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम' (BESS) की ओर देख रही है। जानकारों के मुताबिक, भारत को पीक डिमांड के दौरान बिजली सप्लाई शिफ्ट करने के लिए 3 GW की फोर-आवर स्टोरेज क्षमता की जरूरत है। निवेशकों के लिए अब मॉनिटर करने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कौन सी कंपनियां अपने पोर्टफोलियो में तेजी से स्टोरेज समाधान जोड़ रही हैं, क्योंकि वही कंपनियां आने वाले समय में ग्रिड की इस चुनौती से बेहतर तरीके से निपट सकेंगी।
