भारत ने **300 GW** से अधिक की नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का बड़ा माइलस्टोन हासिल कर लिया है, लेकिन ग्रिड की पुरानी बाधाओं के कारण बिजली की भारी बर्बादी हो रही है। अब सरकार 'India Energy Stack' के जरिए ग्रिड को पूरी तरह मॉडर्न और ऑटोमेटेड बनाने की तैयारी में है।
भारत के पावर सेक्टर में इस समय बड़ा ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है। जुलाई 2026 तक देश की नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता 300.5 GW को पार कर गई है, जो कुल 552 GW क्षमता का 54% से अधिक है। हालांकि, सोलर और विंड एनर्जी की रफ्तार तो तेज रही है, लेकिन हमारा मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर इस तेजी को झेलने में पिछड़ रहा है।
ग्रिड कर्टेलमेंट की समस्या
अप्रैल से जून 2026 के बीच, ग्रिड में ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी के कारण 8 अरब यूनिट से ज्यादा सोलर बिजली बर्बाद हुई। इस बर्बादी को रोकने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ पावर 'India Energy Stack' ला रही है। यह एक डिजिटल फ्रेमवर्क है जो AI और ऑटोमेटेड फोरकास्टिंग के जरिए डिमांड और सप्लाई को रियल-टाइम में बैलेंस करेगा, जिससे पीक आवर्स के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
पावर कंपनियों के लिए नए मौके
ग्रिड को स्मार्ट बनाने की इस मुहिम से उन कंपनियों को सीधा फायदा होगा जो ट्रांसमिशन और स्टोरेज तकनीक पर काम करती हैं। मार्केट की नजरें अब Power Grid Corporation, Adani Energy Solutions और JSW Energy जैसी कंपनियों पर हैं। हाल ही में Power Grid Corporation ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ₹3,598 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इसके अलावा, आने वाले समय में डेटा सेंटर्स के लिए 26.3 GW की अतिरिक्त लोड डिमांड भी पावर सेक्टर के लिए बड़े ट्रिगर का काम करेगी।
जोखिम और सतर्कता
निवेशकों को राज्य स्तरीय डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (DISCOMs) की माली हालत पर नजर रखनी चाहिए। DISCOMs का कर्ज और पेमेंट में देरी प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी कर सकते हैं। साथ ही, अगर ट्रांसमिशन लाइनों का काम रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के मुकाबले धीमा रहा, तो बिजली की बर्बादी (Curtailment) की समस्या बनी रहेगी, जो प्रोजेक्ट्स के रिटर्न पर असर डाल सकती है।
