Heatwave Alert: भारत में बिजली की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ग्रिड पर भारी दबाव!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Heatwave Alert: भारत में बिजली की मांग ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, ग्रिड पर भारी दबाव!
Overview

गर्मी का प्रकोप ऐसा कि भारत का पावर ग्रिड लगातार तीसरे दिन रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग झेल रहा है। बुधवार को मांग **265.44 GW** तक पहुंच गई। भीषण गर्मी के कारण कूलिंग अप्लायंसेस का इस्तेमाल बढ़ा है, जिसने बिजली की खपत को आसमान पर पहुंचा दिया है। हालांकि ग्रिड ने मांग पूरी की, लेकिन यह लगातार बना हुआ रिकॉर्ड इस गर्मी में देश के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।

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ग्रिड पर अभूतपूर्व मांग का दबाव

भारत के नेशनल इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड ने बुधवार, 20 मई 2026 को 265.44 गीगावाट (GW) का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया। यह लगातार तीसरा दिन है जब बिजली की खपत ने रिकॉर्ड तोड़ा है, जिसका मुख्य कारण देश भर में पड़ रहा भीषण गर्मी का प्रकोप है। मांग चरम पर दोपहर 3:45 बजे देखी गई, जब सोलर पावर जेनरेशन अपने उच्च स्तर पर होने के बावजूद ग्रिड पर दबाव बढ़ा। हालांकि, बिजली मंत्रालय ने पुष्टि की है कि ग्रिड ने बिना किसी सप्लाई शॉर्टफॉल के इस मांग को पूरा किया। लेकिन, गर्मी के सामान्य चरम से पहले ही मांग का यह लगातार बना रहना, भारत के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते दबाव को उजागर करता है।

कूलिंग अप्लायंसेस के इस्तेमाल से बढ़ी मांग

रिकॉर्ड बिजली खपत का सबसे बड़ा कारण चल रही हीटवेव है, जिसके चलते कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। इस अत्यधिक गर्मी के कारण एयर कंडीशनर (AC) और अन्य कूलिंग डिवाइस का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है, जिसने बिजली की मांग में भारी वृद्धि की है। मंगलवार को 260.45 GW और सोमवार को 257.37 GW की मांग दर्ज की गई थी, जो पिछले सभी रिकॉर्ड थे। यह रुझान मई के शुरुआती आंकड़ों 250 GW को पार कर गया है और गर्मियों में मांग के 270 GW तक पहुंचने के अनुमानों के अनुरूप है।

ऊर्जा क्षेत्र के सामने गर्मियों की चुनौतियां

हालांकि ग्रिड वर्तमान मांग को पूरा करने में सक्षम रहा है, लेकिन बार-बार बन रहे रिकॉर्ड मांग के नए स्तर महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि गर्मी जारी रहने पर बिजली की खपत और बढ़ेगी। खासकर शाम के समय की यह लगातार उच्च मांग, नॉन-सोलर घंटों के लिए बेहतर ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) और अधिक लचीली उत्पादन क्षमताओं की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है। भारत के ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर और हाइड्रो पावर का मिश्रण उपयोग होता है, जिसमें थर्मल प्लांट्स अभी भी पीक सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी की वृद्धि के बावजूद, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जीवाश्म ईंधन पर बढ़ी हुई निर्भरता स्थिरता संबंधी चिंताएं पैदा करती है। अनुमान बताते हैं कि इस गर्मी में पीक डिमांड 270 GW या उससे अधिक तक पहुंच सकती है, जिसके लिए ग्रिड स्थिरता के लिए निरंतर निगरानी और योजना की आवश्यकता होगी। अत्यधिक मौसम की घटनाएं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को जलवायु प्रभावों के प्रति उनकी भेद्यता को भी उजागर करती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि 'डबल-पीक' चुनौती है: दिन के दौरान सोलर पावर मदद करती है, लेकिन सोलर जेनरेशन कम होने के बाद शाम की पीक डिमांड मुश्किल हो जाती है, जो भंडारण और मांग प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देता है। बिजली मंत्रालय ने 280 GW तक की मांग को पूरा करने के लिए अपनी तत्परता बताई है, लेकिन लगातार रिकॉर्ड-तोड़ उपयोग इन तैयारियों को परख रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.