Power Grid Stability: भारत के पावर ग्रिड पर संकट, सितंबर में सिर्फ **68.8%** समय ही सुरक्षित रहा फ्रीक्वेंसी लेवल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Power Grid Stability: भारत के पावर ग्रिड पर संकट, सितंबर में सिर्फ **68.8%** समय ही सुरक्षित रहा फ्रीक्वेंसी लेवल

सितंबर महीने में भारत का नेशनल पावर ग्रिड केवल **68.81%** समय ही सुरक्षित फ्रीक्वेंसी रेंज में रह पाया। बिजली की मांग और सप्लाई के बीच बढ़ता यह अंतर पावर सेक्टर के लिए चिंता का विषय है, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों पर सीधा असर पड़ सकता है।

ग्रिड फ्रीक्वेंसी का बिगड़ता 'हार्टबीट'

भारत के इलेक्ट्रिकल ग्रिड की स्थिरता पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, ग्रिड 49.9 Hz से 50.05 Hz की सुरक्षित रेंज में केवल 68.81% समय ही टिक पाया। यह फ्रीक्वेंसी ग्रिड के 'हार्टबीट' की तरह है; इसमें उतार-चढ़ाव का मतलब है कि देश में पैदा होने वाली बिजली और खपत होने वाली बिजली के बीच बड़ा तालमेल बिगड़ रहा है।

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए क्यों है यह बड़ा रिस्क?

जब ग्रिड फ्रीक्वेंसी अस्थिर होती है, तो सिस्टम अचानक आई मांग या सोलर-विंड जैसे रिन्यूएबल स्रोतों से मिलने वाली बिजली को संभाल नहीं पाता। ऐसी स्थिति में ग्रिड को ढहने से बचाने के लिए 'कर्टेलमेंट' (Curtailment) करना पड़ता है, यानी पावर प्लांट्स को बिजली सप्लाई रोकने का निर्देश दिया जाता है। कोयले से चलने वाले प्लांट्स के पास अक्सर फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट का सुरक्षा कवच होता है, लेकिन रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स को इसमें बड़ा वित्तीय नुकसान झेलना पड़ता है।

सरकार का ₹6,000 करोड़ का दांव

इन चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने Green Energy Corridor-III के तहत बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पर जोर दिया है। इसके लिए ₹6,000 करोड़ का फंड आवंटित किया गया है। यह स्टोरेज सिस्टम एक बफर के रूप में काम करेगा, जो अतिरिक्त बिजली को स्टोर करेगा और जरूरत पड़ने पर ग्रिड में छोड़ेगा, ताकि फ्रीक्वेंसी को संतुलित रखा जा सके।

निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि इन स्टोरेज प्रोजेक्ट्स का क्रियान्वयन कितनी तेजी से होता है और ये ग्रिड स्टेबिलिटी में कितना सुधार ला पाते हैं। जब तक ये इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पूरे नहीं होते, सेक्टर को मौसम की अनिश्चितता और रिन्यूएबल एनर्जी के उतार-चढ़ाव का दबाव झेलना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.