Pumped Storage Projects: ₹14,500 करोड़ की सरकारी मदद के बाद भी क्यों फंसी Torrent Power की राह?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Pumped Storage Projects: ₹14,500 करोड़ की सरकारी मदद के बाद भी क्यों फंसी Torrent Power की राह?

भारत ने एनर्जी स्टोरेज को बढ़ावा देने के लिए **₹14,500 करोड़** का बड़ा फंड जारी किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर विरोध और पर्यावरण संबंधी मंजूरी की बाधाएं इस सेक्टर की रफ्तार कम कर रही हैं। Torrent Power जैसे बड़े खिलाड़ी भी फिलहाल मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

भारत सरकार ने 4 नवंबर, 2026 को ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज के लिए ₹14,500 करोड़ के वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का ऐलान किया। इसका मकसद साल 2031 तक 92 GWh की क्षमता तैयार करना है, जिसमें 60 GWh केवल पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) के लिए रिजर्व है। हालांकि, यह पॉलिसी जितनी आकर्षक है, जमीनी हकीकत उतनी ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

Saidongar-I और विवादों का साया

महाराष्ट्र में स्थित Torrent Power का 3,000 MW वाला Saidongar-I प्रोजेक्ट इसका ताजा उदाहरण है। कंपनी ने सितंबर 2026 की तिमाही में ₹838 करोड़ का शानदार नेट प्रॉफिट कमाया है, लेकिन प्रोजेक्ट पर संकट गहरा गया है। स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता इस प्रोजेक्ट के खिलाफ लामबंद हैं, क्योंकि इसके लिए 32,000 से ज्यादा पेड़ों की कटाई का डर है, जो कि भीमाशंकर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के पास स्थित है।

निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?

सरकारी फंड मिलने के बावजूद, लैंड एक्विजिशन और फॉरेस्ट क्लीयरेंस जैसे मुद्दे आज भी बड़ी चुनौती हैं। जब भी किसी बड़े प्रोजेक्ट में सामाजिक विरोध होता है, तो उसका सीधा असर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और लागत पर पड़ता है। इससे निवेशकों का रिटर्न प्रभावित हो सकता है।

Central Electricity Authority (CEA) के मुताबिक, भारत को साल 2031-32 तक 26.69 GW की पंप्ड स्टोरेज क्षमता की जरूरत है। अब निवेशकों को इस पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनियां इन स्थानीय समस्याओं को कैसे सुलझाती हैं। क्या मैनेजमेंट कोई बीच का रास्ता निकालेगा या प्रोजेक्ट री-डिजाइन होगा? यह आने वाले समय में कंपनी के कैपिटल एलोकेशन पर गहरा असर डालेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.